Paradeep Phosphates अपनी ₹3,600 करोड़ की बड़ी क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) योजना पर तेजी से काम कर रही है। अगले 2.5 साल में कंपनी 10 लाख टन ग्रेनुलेशन क्षमता बढ़ाएगी और फॉस्फोरिक एसिड व सल्फ्यूरिक एसिड के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) को मजबूत करेगी। Mangalore Chemicals and Fertilisers Ltd (MCFL) के साथ सफल मर्जर (Merger) के बाद कंपनी ने दक्षिणी बाजारों में अपनी पैठ बढ़ाई है और ऑपरेशनल (Operational) तालमेल का लाभ उठाया है। इन सब पहलों के बीच, कंपनी का नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Net Debt-to-Equity Ratio) सुधरकर 0.66x हो गया है।
हालांकि, दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे इन विस्तार की योजनाओं के बीच मार्जिन पर दबाव को दिखाते हैं। रेवेन्यू 15% बढ़कर ₹5,748.67 करोड़ हुआ, लेकिन नेट प्रॉफिट 13% घटकर ₹182.05 करोड़ रहा। ऑपरेटिंग मुनाफे (EBITDA) में 7.7% की वृद्धि के साथ यह ₹471.8 करोड़ रहा। मुख्य चिंता का विषय मार्जिन का सिकुड़ना है, जो Q3 FY25 के 8.8% से घटकर 8.2% रह गया। इसका मतलब है कि बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) रेवेन्यू की ग्रोथ से तेज है। पिछली तिमाही (Q2 FY26) में भी मार्जिन 9.56% पर आ गए थे।
इसी दबाव के चलते 2 फरवरी, 2026 को Paradeep Phosphates का शेयर 2.09% गिरकर ₹132.69 पर बंद हुआ। भारतीय फर्टिलाइजर सेक्टर ग्रोथ तो देख रहा है, लेकिन फॉस्फोरिक एसिड और सल्फर जैसे कच्चे माल (Raw Materials) की इंटरनेशनल कीमतों में उछाल ने लागत बढ़ा दी है। सरकारी सब्सिडी के बावजूद, मार्जिन पर यह दबाव दिख रहा है। ब्रोकरेज फर्म्स (Brokerage Firms) का अनुमान है कि इस स्टॉक में आने वाले 12 महीनों में ₹217.67 तक का लेवल देखने को मिल सकता है।