Odisha तट पर Olive Ridley कछुओं को बचाने के लिए **7 महीने** का फिशिंग बैन लागू हो गया है, जो **31 मई 2027** तक चलेगा। यह फैसला भारतीय सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अमेरिका में वाइल्ड-कॉज्ड श्रिम्प (Shrimp) के बैन को हटाने का रास्ता साफ हो सकता है।
ओडिशा सरकार ने तटों पर 20 किलोमीटर के दायरे में सभी प्रकार की फिशिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी है। यह कदम लुप्तप्राय Olive Ridley कछुओं के ब्रीडिंग सीजन को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि यह एक पर्यावरण संरक्षण की पहल है, लेकिन इसका सीधा असर भारत के सीफूड एक्सपोर्ट बिजनेस पर पड़ रहा है।
अमेरिका के साथ एक्सपोर्ट का 'पेच'
साल 2019 से ही अमेरिका ने भारत से आने वाली वाइल्ड-कॉज्ड झींगा (Shrimp) के आयात पर रोक लगा रखी है। कारण यह है कि फिशिंग नेट में कछुए फंस जाते थे, जिससे अमेरिका के पर्यावरण मानक प्रभावित होते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत का एक्सपोर्ट वॉल्यूम जो 2018-19 में 1,53,000 टन था, वह 2023-24 तक घटकर मात्र 65,800 टन के करीब रह गया है।
सरकारी कोशिशें और 'TEDs' का रोल
इस बैन को हटाने के लिए सरकार अब 'Turtle Excluder Devices' (TEDs) को अनिवार्य कर रही है। 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' के तहत ये डिवाइस मुफ्त बांटे जा रहे हैं ताकि कछुए सुरक्षित बाहर निकल सकें।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
हालाँकि सरकार का दावा है कि TEDs के इस्तेमाल से कैच (कुल मछली पकड़ने) में केवल 1% से 5% की गिरावट आती है, लेकिन स्थानीय ऑपरेटर्स को डर है कि यह नुकसान 10% से 20% तक हो सकता है। फिलहाल, सीफूड कंपनियों के लिए मुख्य मॉनिटरेबल यह है कि कितनी तेजी से यह नई तकनीक अपनाई जाती है और कब अमेरिका अपने आयात नियमों की समीक्षा करता है।
