ओड़िशा सरकार ने खेती-किसानी को आधुनिक बनाने के लिए 6 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स और प्रमुख शोध संस्थान शामिल हैं, जिनका मकसद किसान रजिस्ट्रेशन, e-KYC और जलवायु-सहिष्णु फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
डिजिटल क्रांति की ओर कदम
ओड़िशा सरकार ने अपने कृषि सेक्टर को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। राज्य के 'डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स एम्पावरमेंट' ने 'डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स (ओड़िशा सर्कल)', 'ICRISAT' और 'M.S. Swaminathan Research Foundation (MSSRF)' के साथ साझेदारी की है।
पोस्ट ऑफिस अब बना सेवा केंद्र
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण इलाकों को मिलेगा। सरकार ने 'ग्रामीण डाक सेवकों' के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करने का फैसला किया है। अब किसान को अपने 'Farmer ID' और 'e-KYC' के लिए शहर के चक्कर नहीं काटने होंगे। यह पूरी प्रक्रिया अब गांव के पोस्ट ऑफिस से ही पूरी हो जाएगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक सीधे पहुंचेगा।
जलवायु-सहिष्णु फसलों पर जोर
तकनीक के साथ-साथ प्रोडक्शन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ICRISAT के साथ मिलकर सरकार जलवायु के बदलावों को झेल सकने वाली दाल और तिलहन की किस्मों को विकसित करेगी। इसके अलावा, Nayagarh जिले में 3,000 छोटे किसानों के लिए 3 साल का 'Farming System for Nutrition' प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, ताकि खेती की उत्पादकता और पोषण के स्तर को सुधारा जा सके।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि ये पहल गेम-चेंजर साबित हो सकती है, लेकिन असली परीक्षा किसानों के बीच इनकी स्वीकार्यता (Adoption) पर निर्भर करेगी। ग्रामीण स्तर पर डिजिटल टूल्स का उपयोग और मौसम की अनिश्चितता अभी भी उत्पादन के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजर अब इस बात पर है कि इन डिजिटल मॉडल्स को ओड़िशा के अलग-अलग जिलों में कितनी तेजी से और कितनी कुशलता के साथ लागू किया जाता है।
