मुंबई के पूर्व मजदूर लक्ष्मण डासना ने ओडिशा में अपने **0.25 एकड़** के खेत को ड्रैगन फ्रूट के बागान में बदलकर **₹7.5 लाख** सालाना की कमाई का जरिया बना लिया है। उनकी यह सफलता छोटे खेतों पर खास, महंगी फसलों की खेती और एकीकृत (Integrated) फार्मिंग मॉडल की वित्तीय क्षमता को उजागर करती है।
कैसे बदली किस्मत?
ओडिशा के लक्ष्मण डासना, जो कभी मुंबई में टाइल मिस्त्री का काम करते थे, अब अपने 0.25 एकड़ के खेत से सालाना ₹7.5 लाख कमा रहे हैं। 2021 में मुंबई से लौटने के बाद, उन्होंने अपनी बचत के ₹1.5 लाख लगाकर ड्रैगन फ्रूट का बगीचा तैयार किया। 2026 तक, यह खेत सघन कृषि उत्पादकता का एक मॉडल बन गया है। इस कमाई में ₹5 लाख फलों की बिक्री से और ₹2.5 लाख खास किस्म के पौधों की नर्सरी से आते हैं। यह दिखाता है कि कैसे छोटे टुकड़ों पर सही फसल चुनकर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है।
बिजनेस मॉडल और कमाई
डासना की सफलता का राज है जमीन का पूरा इस्तेमाल और कम लागत। रिंग-पोल और ट्रेलिस सिस्टम का इस्तेमाल करके, उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ में 700 पौधे लगाए हैं। वह 'सियाम रेड' (Siam Red) किस्म के ड्रैगन फ्रूट उगाते हैं, जिनका औसत वजन 450-500 ग्राम प्रति फल होता है। सबसे खास बात यह है कि खेती का सालाना खर्च सिर्फ ₹20,000 के करीब है, क्योंकि वह गोबर, जीवामृत और खाद जैसे जैविक इनपुट का इस्तेमाल करते हैं। यह कम लागत उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में भारी मार्जिन देती है।
जोखिम कम करने के लिए विविधीकरण (Diversification)
सिर्फ ड्रैगन फ्रूट पर निर्भर रहने के बजाय, डासना ने कमाई के कई रास्ते बनाए हैं। ड्रैगन फ्रूट की पंक्तियों के बीच वह स्वीट कॉर्न, बैंगन, हल्दी और अदरक जैसी फसलें भी उगाते हैं। हाल ही में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करके मौसमी उत्पादों में भी विविधता लाई है। उनकी नर्सरी, जहां से वह ओडिशा के अन्य किसानों को पौधे बेचते हैं, एक स्थिर आय का जरिया है।
सरकारी मदद और इंफ्रास्ट्रक्चर
उनकी इस तरक्की में ओडिशा के बागवानी विभाग (Horticulture Department) और जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) का भी हाथ है। इन विभागों ने बोरवेल लगाने और ड्रिप सिंचाई जैसी बुनियादी ढांचे की लागत कम करने में मदद की। ऐसी सरकारी योजनाएं छोटे किसानों के लिए बहुत मददगार साबित होती हैं। तेज गर्मी (जो बालांगीर क्षेत्र में 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकती है) से फसल बचाने के लिए ग्रीन शेड नेट का इस्तेमाल भी जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
डासना का यह मॉडल भारत में हाई-वैल्यू (High-Value) कृषि के बढ़ते चलन को दर्शाता है। इस क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या ऐसी सघन खेती को बड़े पैमाने पर किया जा सकता है, विशेष किस्मों के पौधे आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं, और क्या स्थानीय सप्लाई चेन छोटे किसानों को भुवनेश्वर और कटक जैसे बड़े बाजारों से जोड़ पाती है। एग्रीबिजनेस (Agribusiness) स्पेस में, मुनाफा लॉजिस्टिक्स (Logistics) को संभालने, गुणवत्ता बनाए रखने और मौसमी उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए एकीकृत आय स्रोतों पर बहुत निर्भर करता है।
