भारत सरकार इनलैंड फिशरीज (अंतर्देशीय मत्स्य पालन) को बढ़ावा देने के लिए एक नई निर्यात-उन्मुख नीति बनाने की योजना बना रही है। यह पहल, जिसका लक्ष्य दूरदराज के मछली किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना है, ऐसे समय में आ रही है जब 2025-26 के दौरान मत्स्य पालन निर्यात ने रिकॉर्ड **₹72,000 करोड़** का आंकड़ा पार किया है। हालांकि, इनलैंड फिशरीज वर्तमान में क्षेत्र के कुल निर्यात मूल्य में केवल **2%** का योगदान करती है।
इनलैंड फिशरीज को निर्यात में कैसे मिलेगी बड़ी हिस्सेदारी?
सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है, जिसमें इनलैंड फिशरीज को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात में इनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके। भारत मत्स्य पालन क्षेत्र में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, लेकिन इनलैंड उत्पादन से होने वाली आय निर्यात के मामले में अभी भी केवल 2% पर है। पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने घोषणा की है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) सीधे स्थानीय मछुआरों तक उन्नत कृषि तकनीकें पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों से कैसे निपटेगी सरकार?
आगामी नीति का एक प्रमुख फोकस सप्लाई चेन को और अधिक कुशल बनाना है। वर्तमान में, इनलैंड उत्पादन केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय निर्यात हब तक पहुंचने में महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। सरकार मछली के बीज (seeds) और अंतिम उत्पादों के अधिक प्रभावी परिवहन के लिए ड्रोन जैसी नवीन लॉजिस्टिक समाधानों का मूल्यांकन कर रही है। यह हरियाणा जैसे राज्यों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों से बीज आयात पर निर्भर है। इससे लागत और समय की जटिलताएं बढ़ जाती हैं, जिन्हें सरकार कम करना चाहती है।
निर्यात प्रदर्शन और नीति के मुख्य बिंदु
मत्स्य पालन क्षेत्र ने मजबूत गति दिखाई है, 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर में निर्यात ₹72,000 करोड़ से अधिक रहा। यह पिछली अवधि की तुलना में लगभग ₹10,000 करोड़ की वृद्धि दर्शाता है। सरकार इस वृद्धि का श्रेय काफी हद तक हाल के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से मिले लाभों को देती है, जिन्होंने भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए नए बाजार खोले हैं। नई इनलैंड-केंद्रित नीति का उद्देश्य निर्यात आधार को व्यापक बनाकर इस गति को बनाए रखना है।
2047 के लिए व्यापक कृषि रोडमैप
मत्स्य पालन से परे, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2047 तक के लिए कृषि क्षेत्र के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। नीति आयोग के साथ मिलकर, सरकार का लक्ष्य कुल कृषि उत्पादन को वर्तमान 1.3 बिलियन टन से बढ़ाकर 2.1 बिलियन टन करना है। इस रोडमैप में पारंपरिक मुख्य फसलों जैसे चावल और गेहूं से हटकर दालों, तिलहनों और बागवानी (horticulture) की ओर विविधता लाने पर जोर दिया गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल की पैदावार (yield) में सुधार पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने बताया कि तुअर और मूंग जैसी दालों की वर्तमान उत्पादकता प्रति एकड़ लगभग 5 क्विंटल है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, मंत्रालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीन एडिटिंग जैसे उन्नत क्षेत्रों में युवा वैज्ञानिकों की तैनाती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन पहलों की सफलता किसानों द्वारा इन तकनीकों को प्रभावी ढंग से अपनाने और इनलैंड व तटीय मत्स्य पालन दोनों के लिए नियोजित बुनियादी ढांचे में सुधार के सफल कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। व्यापक कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों पर नजर रखने वाले निवेशक संभावित उत्पादकता लाभ के संकेतकों के रूप में इन लॉजिस्टिक्स और तकनीकी पहलों की तैनाती की निगरानी कर सकते हैं।
