भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) 23 जून 2026 को अपने खुद के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in को लॉन्च करने जा रहा है। इस कदम से खरीफ की खरीद निलामी थर्ड-पार्टी प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स से हटकर NAFED के इन-हाउस सिस्टम पर आ जाएगी, जिसका असर मौजूदा प्राइवेट सेवा प्रदाताओं के बिजनेस पर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
कृषि उपज की खरीद के लिए एक अहम सरकारी एजेंसी, NAFED (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India), 23 जून 2026 को अपना खुद का ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म NAFEX.in लॉन्च करने वाली है। इस पोर्टल का मकसद सरकारी प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) और प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत खरीदे जाने वाले तिलहन और दालों जैसी कृषि वस्तुओं की नीलामी प्रक्रिया को एक ही जगह पर लाना है।
यह प्लेटफॉर्म कंसल्टिंग फर्म Deloitte के साथ मिलकर तैयार किया गया है और इसका लक्ष्य नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल एफिशिएंसी को बढ़ाना है। इस लॉन्चिंग कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शिरकत करेंगे।
प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर्स पर क्या होगा असर?
NAFED सालाना करीब 5.3 मिलियन टन कृषि उत्पादों का कारोबार करता है। इन स्टॉक्स की बिक्री के लिए NAFED अब तक NCDEX e Markets (NeML), mjunction और E-Teach जैसे प्राइवेट ई-ऑक्शन सर्विस प्रोवाइडर्स पर निर्भर रहा है।
वर्तमान में, ये प्राइवेट प्लेटफॉर्म खरीदारों से ट्रेड वैल्यू का करीब 0.03% ट्रांजेक्शन फीस के रूप में लेते हैं। NAFEX.in जैसे इन-हाउस प्लेटफॉर्म पर जाने से NAFED इन ऑपरेशन्स को सीधे अपने कंट्रोल में लेगा। मार्केट के जानकारों और निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि इससे इन प्राइवेट सेवा प्रदाताओं के ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है, जो अब तक सरकारी खरीद की निलामियों के लिए बिचौलिए का काम करते आए हैं।
रणनीतिक व्यावसायिक बदलाव
यह कदम सरकार द्वारा टेक्नोलॉजी के जरिए सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के बड़े प्लान का हिस्सा है। NAFED का अपना पोर्टल विकसित करने का फैसला बाहरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने का एक रणनीतिक लक्ष्य दिखाता है। NAFED ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में NAFEX.in के जरिए अन्य राज्य स्तरीय सहकारी एजेंसियां भी अपनी निलामियां कर सकेंगी, जिससे सहकारी कृषि व्यापार के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल इकोसिस्टम तैयार हो सकता है।
एग्री-टेक सेक्टर के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकारी खरीद का डिजिटाइजेशन एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जहां पिछले एक दशक में प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स ने इन ऑपरेशन्स को बड़े पैमाने पर चलाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया है, वहीं सरकारी इन-हाउस पोर्टल्स का उदय डेटा और ट्रांजेक्शन प्रोसेस पर पूरा नियंत्रण रखने की ओर एक बदलाव को दर्शाता है। इसका लॉन्ग-टर्म बिजनेस इंपैक्ट इस बात पर निर्भर करेगा कि NAFEX.in कितनी जल्दी NeML और mjunction जैसे स्थापित प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स की तरह स्केल, लिक्विडिटी और रिलायबिलिटी हासिल कर पाता है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
एग्री-बिजनेस और एक्सचेंज सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को तीन डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए:
- एडॉप्शन रेट: NAFED कितनी तेजी से अपने नीलामी वॉल्यूम को प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स से NAFEX.in पर शिफ्ट करता है।
- प्लेटफॉर्म स्केलेबिलिटी: क्या NAFEX.in मौजूदा प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स के बराबर हाई ट्रांजेक्शन लोड और सिक्योरिटी रिक्वायरमेंट्स को संभाल पाएगा।
- पॉलिसी डायरेक्शन: क्या अन्य सरकारी एजेंसियां या राज्य फेडरेशन भी अपनी खरीद निलामियों को इन-हाउस पोर्टल्स पर ले जाएंगी, जिससे थर्ड-पार्टी एग्री-ऑक्शन सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए मार्केट और सीमित हो सकता है।
