NACOF ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए **₹2,456 करोड़** का रेवेन्यू और **₹14.89 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह संस्था पूरी तरह से सरकारी सब्सिडी के बिना काम कर रही है और अब रूस, ईरान और चिली जैसे देशों में अपने कारोबार को फैलाने की तैयारी में है।
बिना सरकारी मदद के बढ़ता दबदबा
NACOF (National Federation of Farmers' Procurement, Processing & Retailing Cooperatives of India) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपनी रिपोर्ट पेश की है। सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज के अधीन काम करने वाली इस संस्था ने इस बार अपने सदस्य सोसायटियों के लिए 12% डिविडेंड (Dividend) का भी ऐलान किया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि NACOF ने बिना किसी सरकारी सब्सिडी का सहारा लिए अपने दम पर यह वित्तीय मजबूती हासिल की है।
ग्लोबल मार्केट पर नजर
अब संस्था अपने पारंपरिक कामकाज से आगे बढ़कर इंटरनेशनल ट्रेड की ओर रुख कर रही है। फेडरेशन ने रूस, ईरान, चिली, बांग्लादेश और दुबई जैसे देशों की पहचान की है ताकि भारतीय कोऑपरेटिव्स की पहुंच को ग्लोबल स्तर पर बनाया जा सके। यह एक बड़ा बदलाव है, जहाँ अब फोकस केवल खरीद-फरोख्त पर नहीं, बल्कि जॉइंट वेंचर्स और वैल्यू-चेन इंटीग्रेशन जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स पर है।
आगे की राह और चुनौतियां
विकास को गति देने के लिए NACOF ने अपनी 25 नेशनल शाखाओं से कंक्रीट बिज़नेस प्रपोजल मांगे हैं। मैनेजमेंट का मानना है कि अब समय आ गया है कि कागजी समझौतों से आगे बढ़कर ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाए जो लंबे समय तक प्रॉफिट दे सकें। हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट्स में ट्रेड रेगुलेशन और लॉजिस्टिक्स को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण होगा। संस्था की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन विदेशी प्रोजेक्ट्स को कैसे एग्जीक्यूट करती है और बिना सब्सिडी के अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बरकरार रखती है।
