Monsoon Deficit: मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, खराब पैदावार से बिगड़ सकता है खाने-पीने का बजट

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Monsoon Deficit: मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, खराब पैदावार से बिगड़ सकता है खाने-पीने का बजट

साल 2026 में भारत में मानसून के दौरान **13%** कम बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले एक दशक का सबसे खराब आंकड़ा है। बुआई तो सामान्य है, लेकिन मक्का और दलहन की पैदावार घटने के डर से फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए 2026 का मानसून सीजन चुनौतियों भरा रहा है। साल 2015 के बाद पहली बार दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13% की भारी कमी देखी गई है। हालांकि खरीफ फसलों की बुआई में केवल 1.1% की मामूली गिरावट आई है, लेकिन असमान बारिश और नमी की कमी के कारण अब मुख्य चिंता फसलों की क्वालिटी और पैदावार को लेकर है।

खाद्य पदार्थों पर जोखिम

इसका असर सभी फसलों पर एक जैसा नहीं है। चावल और गेहूं जैसी मुख्य फसलों के लिए सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक है, जिससे कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं। लेकिन मक्का और दलहन के पास ऐसी सुरक्षा नहीं है, जिससे इनकी कीमतों में उछाल आने का रिस्क ज्यादा है। खासकर मक्का, जो पोल्ट्री, पशु आहार और इथेनॉल जैसे उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। आपूर्ति में कमी होने पर इन सेक्टरों की कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।

महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

देश में फूड इन्फ्लेशन 5.06% है, जो सामान्य रिटेल इन्फ्लेशन (3.54%) के मुकाबले काफी ज्यादा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में कम बारिश के कारण किसानों की आय प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण इलाकों में कंज्यूमर गुड्स की डिमांड सुस्त पड़ने का डर है।

रबी सीजन पर टिकी नजरें

अब सबकी नजरें रबी सीजन पर टिकी हैं। मानसून की कमी के चलते कई क्षेत्रों में जलाशयों का स्तर सामान्य से कम है, जो सिंचाई के लिए बड़ी चुनौती है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने FY27 के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 1% कर दिया है। निवेशकों को अब जलाशयों में पानी की उपलब्धता और रबी बुआई के आंकड़ों पर खास नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.