दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज़्यादा फायदा किसानों को
Milma, केरल की प्रमुख डेयरी कोऑपरेटिव, 1 जून से अपने दूध की कीमतों में ₹4 प्रति लीटर का इजाफा करेगी। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस फैसले की पुष्टि की है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्पादन, खरीद और वितरण की बढ़ती लागतों को पूरा करना है, जिसका सीधा असर डेयरी किसानों पर पड़ रहा है। इस ₹4 की बढ़ोतरी में से ₹3.35 प्रति लीटर, यानी 83% से भी ज़्यादा हिस्सा सीधे किसानों की जेब में जाएगा। चुनाव आचार संहिता के कारण इसमें कुछ देरी हुई थी, लेकिन अब सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। किसानों को अब ₹43.39 प्रति लीटर का भुगतान किया जाएगा, जो पहले ₹40.04 था।
क्यों महंगा हो रहा है दूध?
यह मूल्य समायोजन ऐसे समय में हो रहा है जब डेयरी सेक्टर भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। पशुओं के चारे, ईंधन, परिवहन और पैकेजिंग की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वहीं, केरल में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन में आई कमी के चलते Milma को पड़ोसी राज्यों से अधिक दूध खरीदना पड़ रहा है। Milma का टर्नओवर 2023-24 में ₹4,346.67 करोड़ तक पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद कोऑपरेटिव को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें 2018-19 में नेट लॉस भी शामिल है।
राष्ट्रीय स्तर पर, Amul और Mother Dairy जैसी डेयरी कोऑपरेटिव्स ने भी हाल ही में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जो इंडस्ट्री में बढ़ती लागतों को दर्शाती है। दूध, भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) का एक अहम हिस्सा है, और इस तरह की बढ़ोतरी से खाद्य महंगाई (food inflation) में इजाफा होता है।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब है कि उपभोक्ताओं को दूध के लिए ज़्यादा भुगतान करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, 500ml के टोन्ड मिल्क पैकेट की कीमत ₹26 से बढ़कर ₹28 हो जाएगी। इससे घरों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, खासकर जब ईंधन और अन्य ज़रूरी सामानों की कीमतें भी बढ़ रही हैं। दूध की बढ़ी हुई कीमतें अन्य डेयरी उत्पादों और खाद्य पदार्थों की लागत को भी प्रभावित कर सकती हैं, जिससे केरल में खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।
Milma की भविष्य की योजनाएं
Milma का लक्ष्य किसानों की आय को प्राथमिकता देकर केरल में डेयरी फार्मिंग की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है। कोऑपरेटिव अपनी वैल्यू-एडेड उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार करके और रिटेल उपस्थिति को मजबूत करके 2030 तक ₹10,000 करोड़ का संगठन बनने की योजना बना रही है। यह रणनीति बढ़ती परिचालन लागतों को प्रबंधित करने के साथ-साथ किसानों की भलाई और उपभोक्ताओं के लिए सामर्थ्य को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
