Milky Mist Dairy Food के ₹1,553 करोड़ के IPO में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। बोली लगने के दूसरे दिन ही यह इश्यू पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया। ग्रे मार्केट (Grey Market) के रुझान बता रहे हैं कि शेयर की लिस्टिंग करीब 17% के प्रीमियम पर हो सकती है।
IPO में क्या है खास?
Milky Mist Dairy Food का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 12 अगस्त 2026 को बोली लगने के दूसरे दिन ही फुल सब्सक्राइब हो गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, ₹1,553 करोड़ जुटाने के इस इश्यू में निवेशकों की ओर से पर्याप्त दिलचस्पी देखी गई, जिससे यह पूरी तरह से भर गया। 11 अगस्त को खुला यह इश्यू 18 अगस्त 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने वाला है।
इस IPO की प्राइस बैंड ₹133 से ₹140 प्रति शेयर रखी गई है। इसमें ₹1,428 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹125 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। बाजार के जानकारों की मानें तो ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), जो कि सेंटीमेंट का एक अनौपचारिक संकेतक है, करीब ₹22.50 से ₹24 प्रति शेयर के आसपास चल रहा है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि शेयर प्राइस बैंड के ऊपरी सिरे से लगभग 16% से 17% के प्रीमियम पर लिस्ट हो सकता है। हालांकि, निवेशक इसे सिर्फ एक संकेत मानते हैं, गारंटी नहीं।
कर्ज़ और वैल्यूएशन पर सवाल?
जहां एक ओर आईपीओ के सब्सक्रिप्शन से बाजार की दिलचस्पी दिख रही है, वहीं दूसरी ओर एनालिस्ट और निवेशक कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं। IPO से जुटाई जाने वाली रकम में से करीब ₹496.86 करोड़ का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज़ को चुकाने या प्री-पेमेंट के लिए किया जाएगा। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी पर फिलहाल करीब ₹1,671.85 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज़ है। इस कर्ज़ को कम करना एक रणनीतिक कदम है, लेकिन कंपनी की उधारी को मैनेज करने की क्षमता उसके भविष्य के लिए अहम होगी।
एक और बात जिस पर ध्यान दिया जा रहा है, वह है कंपनी का वैल्यूएशन। IPO की कीमत को देखते हुए, प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 71x से 85x के बीच अनुमानित है, जो कि कुछ स्थापित डेयरी कंपनियों की तुलना में महंगा माना जा रहा है। यह रेश्यो बताता है कि निवेशक कंपनी की कमाई के हर रुपये के लिए कितना भुगतान कर रहे हैं। हाई P/E रेश्यो यह संकेत देता है कि बाजार भविष्य में कंपनी से बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है।
जोखिम और आगे क्या?
निवेशक कंपनी के बिज़नेस रिस्क पर भी गौर कर रहे हैं। Milky Mist मुख्य रूप से तमिलनाडु में अपनी एक ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर निर्भर है, जो एक कंसंट्रेशन रिस्क पैदा करती है। इस यूनिट में किसी भी तरह की समस्या सीधे उत्पादन और सप्लाई को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, कंपनी की दक्षिण भारत में मजबूत पकड़ है, लेकिन उसे Amul, Mother Dairy और Nestlé जैसे बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इन कंपनियों के पास मजबूत सप्लाई चेन और जाने-माने ब्रांड हैं, जो Milky Mist के विस्तार में चुनौती पेश कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि अलॉटमेंट का आधार (Basis of Allotment) क्या रहता है, जो 14 अगस्त 2026 को अपेक्षित है। इसके बाद, 18 अगस्त 2026 को स्टॉक की लिस्टिंग और कंपनी कैसे अपने विस्तार के लिए जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल करके अपनी बाजार पहुंच और उत्पादन क्षमताओं को वर्तमान क्षेत्रीय आधार से आगे बढ़ाती है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
