Manipur में खरीफ की फसल पर डबल मार: बारिश की कमी और अशांति से उपज में 50% तक की गिरावट

AGRICULTURE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Manipur में खरीफ की फसल पर डबल मार: बारिश की कमी और अशांति से उपज में 50% तक की गिरावट

मणिपुर का खेती-किसानी का क्षेत्र इस वक्त दोहरी मार झेल रहा है। अनियमित मॉनसून की बारिश और राज्य में जारी सुरक्षा की चिंता के चलते धान की उपज में 50% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हजारों हेक्टेयर बंजर पड़ी जमीन इस संकट को और बढ़ा रही है, जिससे राज्य की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।

बारिश की कमी और तापमान में बढ़ोतरी ने बिगाड़ी खेती की चाल

साल 2026 में मणिपुर की कृषि अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट से जूझ रही है। इसका मुख्य कारण है मौसम में बड़ा बदलाव और राज्य में लंबे समय से जारी अस्थिरता। जून के महीने में जहां सामान्य से 71% कम बारिश हुई, वहीं जुलाई में भी यह कमी 41% रही। पानी की इस कमी और बढ़ते तापमान ने धान की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है, जो इस क्षेत्र की मुख्य फसल है।

आंकड़े बताते हैं कि बुवाई और रोपाई का सही समय हाथ से निकल चुका है। इस वजह से पौधे ठीक से विकसित नहीं हो पा रहे हैं और बुवाई में देरी हो रही है। किसानों की मानें तो उपज में लगभग 50% की गिरावट आई है। ऐसे में, किसान अब कम समय में पकने वाली हाइब्रिड किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि किसी तरह कुछ फसल बचाई जा सके। हालांकि, कई घाटी इलाकों में सिंचाई के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण जलवायु-अनुकूल फसल की किस्में विकसित करने में भी मुश्किलें आ रही हैं।

सुरक्षा चिंताएं और खाली पड़ी जमीनें

मौसम की मार के अलावा, राज्य की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताएं भी खेती-किसानी को प्रभावित कर रही हैं। साल 2023 से अब तक करीब 5,127 हेक्टेयर कृषि भूमि या तो खाली पड़ी है या फिर बंजर हो गई है। खेती न होने और ग्रामीण सप्लाई चेन के ठप पड़ने से किसानों के लिए काम करना और भी मुश्किल हो गया है। खेती योग्य भूमि के कम इस्तेमाल का सीधा असर राज्य की खाद्य सुरक्षा पर पड़ा है और लोगों की बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता बढ़ी है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति लंबे समय के लिए कमजोर हो गई है।

यह स्थिति उन सभी राज्यों के लिए एक चेतावनी है जहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खेती पर निर्भर है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव, जैसे बारिश का अनियमित वितरण और अचानक आने वाली मौसम की मार, और सामाजिक अस्थिरता मिलकर कृषि क्षेत्र को उबरने से रोक रहे हैं। मणिपुर में इन चुनौतियों से निपटने के बीच, स्थानीय बारिश पर निर्भर खेती चिंता का विषय बनी हुई है।

राज्य के कृषि क्षेत्र के स्वास्थ्य पर नजर रखने वालों के लिए भविष्य में सिंचाई परियोजनाओं का पूरा होना, जलवायु-अनुकूल बीज का सही वितरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का फिर से पटरी पर आना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से फसल बीमा और जारी संघर्ष से विस्थापित किसानों के लिए सहायता नीतियों पर भी नजर रखी जा रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.