आंध्र प्रदेश में टोमैटपुरी आम की कीमतें अचानक गिरकर **₹4-6 प्रति किलो** पर आ गई हैं। वहीं, कोंकण के अल्फांसो आम के एक्सपोर्ट में भी जलवायु क्षति और शिपिंग में देरी के चलते रुकावटें आ रही हैं। सरकार ने एक्सपोर्टर्स के लिए सपोर्ट स्कीम शुरू की है, लेकिन किसानों को अभी भी मांग और कीमत की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
Detailed Coverage
आंध्र में आम किसानों पर टूटा दुखों का पहाड़!
भारतीय आम उत्पादकों के लिए यह सीजन काफी मुश्किल साबित हो रहा है। आंध्र प्रदेश में टोमैटपुरी किस्म के आम उगाने वाले किसान भयानक मूल्य गिरावट का सामना कर रहे हैं। आमों का भाव गिरकर ₹4 से ₹6 प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि पिछले सालों में यह ₹18 से ₹20 प्रति किलो तक था। इस गिरावट से छोटे किसानों की आय पर भारी दबाव आ गया है।
इस समस्या से निपटने के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मिलकर कुछ सुझाव दिए हैं। इनमें पुराने बागों को फिर से हरा-भरा करना और बेहतर किस्मों की ओर बढ़ना शामिल है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर खरीद और कोल्ड स्टोरेज सेंटर बनाने की भी बात कही गई है, ताकि मौसम के हिसाब से आम की अधिक सप्लाई को संभाला जा सके। एक और सुझाव यह भी है कि कमर्शियल जूस में 20% टोमैटपुरी पल्प मिलाने से इसकी मांग बढ़ सकती है।
अल्फांसो एक्सपोर्ट पर भी संकट के बादल
जहां टोमैटपुरी आम के दाम गिर रहे हैं, वहीं प्रीमियम अल्फांसो आम के एक्सपोर्टर्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के कोंकण बेल्ट, खासकर रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के उत्पादकों ने बेमौसम गर्मी और खराब मौसम के कारण फसल को काफी नुकसान होने की रिपोर्ट दी है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उपयुक्त उच्च-गुणवत्ता वाले आमों की सप्लाई कम हो गई है।
एक्सपोर्टर्स को शिपिंग की समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है, जिससे उत्पाद की अंतिम लागत बढ़ रही है। इसमें माल ढुलाई की बढ़ती दरें, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण लगने वाले सरचार्ज और शिपिंग कंटेनरों की कमी शामिल है। इन सब कारणों से एक्सपोर्ट प्रक्रिया मुश्किल हो गई है और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी मूल्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए, सरकार ने RELIEF स्कीम शुरू की है। इस स्कीम के तहत बीमाकृत एक्सपोर्टर्स को वित्तीय सहायता दी जाएगी और माल ढुलाई व बीमा खर्चों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे MSMEs को भुगतान की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
