खेती में AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
महाराष्ट्र सरकार खेती को बेहतर बनाने के लिए AI को बड़े पैमाने पर लागू करने जा रही है। अब डेमो प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर, राज्य की कोशिश है कि AI तकनीक लाखों किसानों तक पहुंचे, ताकि खाद्य सुरक्षा और जलवायु के प्रति लचीलापन बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री ने इस विज़न पर जोर दिया है कि AI समाधान अब प्रदर्शन से आगे बढ़कर आम किसानों के लिए उपलब्ध होने चाहिए। इस पहल की नींव Mahayagri AI Policy 2025-2029 है, जो ओपननेस और इंटरऑपरेबिलिटी को प्राथमिकता देते हुए एक इकोसिस्टम-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। पॉलिसी के शुरुआती तीन सालों के लिए ₹500 करोड़ का बजट रखा गया है। इसका उद्देश्य जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, AI, IoT और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को रियल-टाइम, डेटा-संचालित फार्मिंग प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत करना है।
किसानों के लिए डिजिटल इकोसिस्टम
महाराष्ट्र की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एक AI-संचालित, बहुभाषी मोबाइल प्लेटफॉर्म है। यह किसानों को उनकी ज़रूरतों के अनुसार व्यक्तिगत सलाह, कीटों के बारे में अलर्ट, बाज़ार की जानकारी और सरकारी सेवाओं तक पहुँच प्रदान करेगा। इस प्लेटफॉर्म को 2.5 मिलियन से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो किसानों की AI-संचालित टूल्स को अपनाने की तत्परता को दर्शाता है, खासकर जब वे उनकी ज़रूरतों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए हों। प्लेटफॉर्म हाइपरलोकल मौसम की जानकारी, कीटों के प्रकोप की शुरुआती चेतावनी, और सिंचाई व खाद के सही इस्तेमाल के लिए सटीक सुझाव देता है। कॉटन किसानों के लिए, जियोस्पेशियल एनालिटिक्स को कीट निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिससे फसल की भेद्यता और वित्तीय जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। यह 'प्रिडिक्टिव गवर्नेंस' का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके साथ ही, एक स्टेटवाइड इंटरऑपरेबल एग्रीकल्चर डेटा एक्सचेंज भी ओपन स्टैंडर्ड पर विकसित किया जा रहा है, ताकि डेटा किसानों को सशक्त बना सके। राज्य वैल्यू चेन में पारदर्शिता, खाद्य सुरक्षा और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए एक ट्रेसबिलिटी-फोकस्ड डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी स्थापित कर रहा है, जिसे एक रेप्लिकेबल पब्लिक डिजिटल मॉडल के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
निवेश और ग्लोबल सहयोग
महाराष्ट्र सक्रिय रूप से वेंचर कैपिटल, मल्टीलेटरल लेंडर्स और इम्पैक्ट इन्वेस्टर्स को आकर्षित कर रहा है ताकि स्केलेबल एडवायजरी प्लेटफॉर्म, ट्रेसबिलिटी मॉड्यूल और रूरल AI कैपेसिटी-बिल्डिंग फ्रेमवर्क को को-डेवलप किया जा सके। राज्य के ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 11-13.6% है और यह 50% से अधिक कार्यबल को रोजगार देता है। विशाल कृषि भूमि और बढ़ते एग्री-स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ, राज्य AI पहलों को बढ़ावा देने और उनका पैमाना बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। इंडिया AI मिशन, वर्ल्ड बैंक और वाधवानी AI के साथ सहयोग कृषि में AI के ग्लोबल यूज़ केसेस के डॉक्यूमेंटेशन और प्रसार को सुविधाजनक बना रहा है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलिसी में 'सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के साथ AI सिस्टम डिजाइन करने' पर जोर दिया गया है, और 2026 को 'खेती में महिलाओं का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया गया है।
चुनौतियों का सामना: स्केलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
महत्वाकांक्षी पॉलिसी फ्रेमवर्क और सफल पायलट प्रोजेक्ट्स के बावजूद, भारत के विविध कृषि परिदृश्य में AI तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने में महत्वपूर्ण बाधाएं हैं। फ्रैग्मेंटेड इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-क्वालिटी डेटा की सीमित पहुंच और छोटे किसानों के लिए affordability (लागत वहन क्षमता) चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार, भारत की छोटी ज़मीनों की जोत (औसतन 2 हेक्टेयर या उससे कम) स्केलेबिलिटी, मेकेनाइजेशन और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन को सीमित करती है, जिससे मार्जिनल किसान अक्सर सब्सिस्टेंस-लेवल प्रोडक्शन तक ही सीमित रह जाते हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल लिटरेसी एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है, जहाँ 20% से भी कम भारतीय किसान वर्तमान में डिजिटल तकनीकों का उपयोग करते हैं, और AI-एनेबल्ड सॉल्यूशंस का तो इससे भी कम। एडवांस्ड एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी की उच्च प्रारंभिक लागत भी किसानों के लिए, जिनकी औसत वार्षिक आय लगभग $1,500 है, निषेधात्मक साबित होती है। इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति जैसे अस्थिर इंफ्रास्ट्रक्चर, AI एप्लिकेशन्स के लिए आवश्यक रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर में बाधा डाल सकते हैं, और AI वर्कलोड्स के लिए आवश्यक पावर व वाटर रिसोर्सेज की कमी भी चुनौतियां पेश कर सकती है। टेक्नोलॉजी पर भरोसा और मजबूत एथिकल गवर्नेंस को सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है ताकि AI मौजूदा असमानताओं को और न बढ़ाए।
भविष्य का दृष्टिकोण और निवेश की संभावना
इंडिया एग्रीटेक मार्केट में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका अनुमान 2027 तक USD 34 बिलियन तक पहुँचने का है। महाराष्ट्र की सक्रिय पॉलिसी और निवेश के निमंत्रण इसे इस ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में रखते हैं। राज्य का लक्ष्य खंडित डेटा से इंटरऑपरेबल सिस्टम की ओर और प्रयोग से एग्जीक्यूशन की ओर बढ़ना है, और यह स्केलेबल एडवायजरी प्लेटफॉर्म्स व ट्रेसबिलिटी मॉड्यूल के सह-विकास के लिए निवेश की तलाश कर रहा है। महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में 2024-25 के लिए 8.7% की अनुमानित वृद्धि देखी जा रही है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुधार का संकेत देती है। महाराष्ट्र द्वारा यह रणनीतिक कदम अन्य राज्यों और व्यापक ग्लोबल साउथ के लिए एक रेप्लिकेबल मॉडल के रूप में काम कर सकता है, बशर्ते कि महत्वपूर्ण कार्यान्वयन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जाए।