Maharashtra Drought: राज्य के 265 तालुका सूखे की चपेट में, निवेश पर पड़ेगा सीधा असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Maharashtra Drought: राज्य के 265 तालुका सूखे की चपेट में, निवेश पर पड़ेगा सीधा असर

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। बारिश की भारी कमी के चलते सरकार ने राहत पैकेज और लोन रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया है, जिसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार पर दिख सकता है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 32 जिलों में फैली गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। 2016 के ड्रॉट मैनेजमेंट कोड को लागू करते हुए प्रशासन ने उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बारिश में 25% से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

सरकार के राहत कदम

संकट को कम करने के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं:

  • लोन रीस्ट्रक्चरिंग: किसानों के फसल कर्ज को रीस्ट्रक्चर किया जा रहा है और रिकवरी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
  • बिजली बिल में राहत: 7.5 हॉर्सपावर से ऊपर के कृषि पंपों के लिए बिजली बिल में रियायत दी गई है।
  • रोजगार गारंटी: पलायन रोकने के लिए रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के नियमों में ढील दी गई है।

किसानों और बाजार पर प्रभाव

राज्य में कुल बारिश की कमी 18.8% रही है, लेकिन मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में यह आंकड़ा 30% के पार है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों जैसे कपास, सोयाबीन और दालों पर पड़ा है। सोलापुर, नासिक और लातूर जैसे प्रमुख कृषि केंद्रों में फसल बर्बादी बड़े पैमाने पर हुई है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को अब तीन सेक्टरों पर बारीक नजर रखनी होगी:

  1. रूरल कंजम्पशन: टू-व्हीलर, ट्रैक्टर और FMCG कंपनियों की बिक्री में गिरावट आ सकती है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में क्रय शक्ति (purchasing power) घटने की आशंका है।
  2. एग्री-इनपुट: उर्वरक (fertilizers) और कीटनाशक कंपनियों की डिमांड कमजोर हो सकती है।
  3. बैंकिंग और NBFC: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में लोन देने वाले बैंकों और NBFCs के एसेट क्वालिटी पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे लोन रिकवरी में देरी हो सकती है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.