Maharashtra Sugar Mills: संकट में फंसी चीनी मिलों के लिए सरकार का बड़ा तोहफा, ₹750 करोड़ का लोन पैकेज मंजूर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Maharashtra Sugar Mills: संकट में फंसी चीनी मिलों के लिए सरकार का बड़ा तोहफा, ₹750 करोड़ का लोन पैकेज मंजूर

महाराष्ट्र कैबिनेट ने को-ऑपरेटिव शुगर मिलों के लिए **₹750 करोड़** के सॉफ्ट लोन पैकेज को मंजूरी दी है। इसका मकसद **2025-26** सीजन के लिए किसानों का बकाया भुगतान करना है, ताकि **2026-27** का पेराई सीजन बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की को-ऑपरेटिव शुगर मिलों को बड़ी राहत देते हुए ₹750 करोड़ के सॉफ्ट लोन पैकेज का ऐलान किया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि मिलों पर बकाया 'फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस' (FRP) का भुगतान करने के लिए यह फंड जारी किया जाएगा।

सरकार उठाएगी ब्याज का बोझ

इस फैसले की सबसे अहम बात यह है कि इन लोन पर लगने वाला ब्याज राज्य सरकार खुद भरेगी। इससे मिलों का वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा और वे अपना कैश फ्लो आने वाले 2026-27 सीजन की तैयारी में लगा सकेंगी। सरकार का लक्ष्य शुगर सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखना है।

सपोर्ट क्यों जरूरी है?

भारत में को-ऑपरेटिव शुगर मिलें अक्सर पतले मार्जिन पर काम करती हैं। पेराई सीजन के दौरान उन्हें किसानों को भारी मात्रा में भुगतान करना पड़ता है। महाराष्ट्र में FRP का अनुपालन 99.5% के करीब है, जो देश में सबसे ज्यादा है, लेकिन लिक्विडिटी की समस्या अक्सर इन मिलों की राह का रोड़ा बनती है। यह लोन पैकेज एक ब्रिज की तरह काम करेगा ताकि पेमेंट में देरी के चलते किसानों के प्रदर्शन जैसी स्थितियों से बचा जा सके।

सेक्टर के सामने चुनौतियां

निवेशकों को यह समझना होगा कि यह सरकारी मदद शॉर्ट-टर्म राहत तो है, लेकिन सेक्टर की स्ट्रक्चरल चुनौतियां बरकरार हैं। मिलों का मुनाफा चीनी और इथेनॉल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। इसके अलावा, बार-बार सरकारी मदद पर निर्भरता मिलों की अपनी कार्यक्षमता (Efficiency) पर सवालिया निशान लगा सकती है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह पूंजी निवेश भविष्य में मिलों की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार लाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.