MP गेहूं खरीद घोटाला: फर्जी किसान आईडी से सरकारी खजाने पर डाका!

AGRICULTURE
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AuthorAditya Rao|Published at:
MP गेहूं खरीद घोटाला: फर्जी किसान आईडी से सरकारी खजाने पर डाका!

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य के खरीद केंद्रों पर फर्जी किसान आईडी का इस्तेमाल कर सरकारी फंड की हेराफेरी की गई है। इस मामले में अधिकारियों की मिलीभगत का भी शक जताया जा रहा है, जिसने राज्य के **10.42 मिलियन मीट्रिक टन** के रिकॉर्ड गेहूं खरीद के आंकड़ों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

घोटाला कैसे हुआ?

मध्य प्रदेश में सरकारी गेहूं खरीद योजना में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में पता चला है कि खरीद केंद्रों पर नकली किसान आईडी का इस्तेमाल करके न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत भुगतान हड़प लिया गया। इस मामले ने राज्य के कृषि आंकड़ों और प्रशासनिक निगरानी की असलियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिकॉर्ड खरीद पर संदेह!

हाल ही में राज्य के अधिकारियों ने 1.341 मिलियन किसानों से 10.42 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद का दावा किया था। MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय की गई थी। लेकिन अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इन रिकॉर्डों को फर्जीवाड़े से फुलाया तो नहीं गया। खासकर 5 से 10 मार्च के बीच असामान्य समय पर हुए आवेदनों में हुई अचानक बढ़ोतरी ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है।

जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर

जांच में सामने आया है कि जमीन के रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल किया गया, जिसमें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के लाभार्थियों के डेटा का भी उनकी जानकारी के बिना इस्तेमाल हुआ। पटवारी और तहसीलदार जैसे अधिकारियों द्वारा की जाने वाली सामान्य सत्यापन प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया। कई मामलों में, जरूरी किरायेदारी समझौते (tenancy agreements) गायब थे और गेहूं की खरीद ऐसे स्थानों पर हुई जो रजिस्ट्रेशन से मेल नहीं खाती थी।

मुनाफाखोरी का खेल

इस पूरे घोटाले के पीछे की मंशा राज्य के MSP (जिसमें सरकारी बोनस भी शामिल है) और पड़ोसी राज्यों में गेहूं की कम बाजार कीमत के बीच का अंतर बताया जा रहा है। कथित तौर पर, धोखाधड़ी करने वालों ने राज्य के बाहर से सस्ता गेहूं खरीदकर उसे मध्य प्रदेश में स्थानीय उत्पाद के रूप में बेच दिया और कीमत के अंतर से मुनाफा कमाया।

कानूनी कार्रवाई जारी

कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई चल रही है। भिंड में कई पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है और फर्जी किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं, राजगढ़ जिले में आठ सहकारी समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को बर्खास्त कर दिया गया है, साथ ही चार पटवारियों को निलंबित किया गया है। जिला आपूर्ति अधिकारी का कहना है कि प्रशासन इन अनियमितताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस जांच से बिचौलियों और सरकारी कर्मचारियों की और बड़ी भूमिका सामने आने की उम्मीद है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.