मध्य प्रदेश की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने रायसेन जिले में मूंग खरीद में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जालसाजों ने किसानों के जमीन रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल कर खुले बाजार से खरीदी गई मूंग को सरकारी MSP पर बेचा, जिससे सरकारी खजाने को लगभग **₹13.35 लाख** का चूना लगा है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में कृषक सेवा सहकारी समितियों में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि श्रीराम ठाकुर, रंजीत ठाकुर और गौरव ठाकुर नाम के तीन आरोपियों ने सिस्टम के साथ बड़ी छेड़छाड़ की है। इन्होंने उन किसानों के जमीन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया, जिन्होंने सरकारी खरीद के लिए अपना रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया था। आरोपियों ने अपनी मूंग को इन किसानों के नाम पर सरकारी केंद्रों पर खपा दिया।
कैसे बनाया मुनाफा?
घोटाले का मुख्य जरिया बाजार भाव और सरकारी रेट का अंतर (Price Gap) बना। 2024-25 और 2025-26 सीजन के दौरान खुले बाजार में मूंग का भाव ₹1,500 से ₹3,300 प्रति क्विंटल के बीच था, जबकि सरकार इसे ₹8,600 से ज्यादा के भाव पर खरीद रही थी। आरोपियों ने सस्ते दाम पर मूंग खरीदकर उसे सरकारी केंद्रों पर MSP पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया।
सिस्टम पर उठे सवाल
फिलहाल EOW मामले की गहन जांच कर रही है और इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या सहकारी समिति के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया। यह घटना सरकारी खरीद प्रक्रिया में डिजिटल वेरिफिकेशन और लैंड रिकॉर्ड्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले इस गिरोह के खिलाफ जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
