उत्तर भारत में पराली जलाने के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। 15 अक्टूबर, 2026 तक मध्य प्रदेश में अकेले **350** मामले दर्ज किए गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को **₹430.87 करोड़** की मदद जारी की है और मशीनों का वितरण तेज कर दिया है।
देश के उत्तरी राज्यों में कृषि अवशेषों को जलाने की समस्या एक बार फिर गहरा गई है। आंकड़ों के अनुसार, 15 अक्टूबर तक देश भर में कुल 793 मामले सामने आए, जिनमें से सबसे अधिक 350 केस अकेले मध्य प्रदेश से हैं। इसके विपरीत, हरियाणा में मामले घटकर 8 और उत्तर प्रदेश में 134 रह गए हैं। वहीं, राजस्थान में पराली जलाने की घटनाओं में 30% की वृद्धि देखी गई है।
सरकार की रणनीति और मशीनरी सपोर्ट
दिवाली के नजदीक आने और रबी सीजन की बुआई के दबाव के बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार 'क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट' (CRM) स्कीम के तहत काम कर रही है, जिसका कुल बजट ₹592.57 करोड़ है। इसमें से ₹430.87 करोड़ पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
अब तक किसानों को 3.54 लाख से अधिक मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिनमें केवल इस फाइनेंशियल ईयर में ही 26,109 नई मशीनें जोड़ी गई हैं।
नई तकनीकी पहल
कृषि मंत्रालय अब किसानों को Pusa 2090 और PR126 जैसी कम अवधि वाली धान की किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इन किस्मों का उद्देश्य फसल की कटाई की अवधि को कम करना है, ताकि किसानों को रबी फसलों की बुआई के लिए पर्याप्त समय मिल सके और उन्हें पराली जलाने की जरूरत न पड़े। निवेशकों के लिए यह सेक्टर मशीनीकरण और नई कृषि तकनीकों के बढ़ते बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
