MP किसानों के पैसे डूबे? PMFBY की नई टेक्नोलॉजी पर सवाल, क्लेम सेटलमेंट में आई बड़ी गिरावट

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AuthorMehul Desai|Published at:
MP किसानों के पैसे डूबे? PMFBY की नई टेक्नोलॉजी पर सवाल, क्लेम सेटलमेंट में आई बड़ी गिरावट

मध्य प्रदेश के किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा क्लेम (Claim) मिलने में देरी और भुगतान में भारी कटौती की शिकायत की है। अब यह योजना पूरी तरह से टेक्नोलॉजी-आधारित क्लेम असेसमेंट सिस्टम, YES-TECH पर निर्भर हो गई है, जिस पर किसान सवाल उठा रहे हैं। उन्हें डर है कि सैटेलाइट-आधारित मॉडल जमीनी स्तर पर हुई फसल की बर्बादी को ठीक से नहीं आंक पाएंगे। यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल के बजट में फसल बीमा के लिए आवंटन में **23%** की कटौती की गई है।

किसानों की चिंताएं बढ़ीं

मध्य प्रदेश के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लेकर काफी चिंतित हैं। उनकी मुख्य समस्या है कि अब क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlement) के लिए पूरी तरह से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। इस नए सिस्टम को YES-TECH (Yield Estimation System based on Technology) कहा जाता है। यह सिस्टम सैटेलाइट इमेजरी, मौसम डेटा और AI मॉडल का इस्तेमाल करके फसल की पैदावार का अनुमान लगाता है। पहले, क्लेम सेटलमेंट के लिए फसल कटाई के मैन्युअल प्रयोग (Manual Crop Cutting Experiments) होते थे, लेकिन अब उन्हें इसी टेक्नोलॉजी से बदला जा रहा है।

हालांकि सरकार का मकसद YES-TECH से क्लेम सेटलमेंट में पारदर्शिता (Transparency) और तेजी लाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका उल्टा असर दिख रहा है। सीहोर, भोपाल और विदिशा जैसे जिलों के किसानों ने बताया है कि उन्हें मिलने वाले क्लेम भुगतान में भारी गिरावट आई है। किसानों का कहना है कि टेक्नोलॉजी-आधारित अनुमानों में स्थानीय स्तर पर हुई फसल की बर्बादी, जैसे कि कीटों का हमला या मौसम की अचानक मार, का ठीक से आकलन नहीं हो पाता, जिसे सैटेलाइट सेंसर पकड़ नहीं पाते। इस वजह से, किसानों को डिजिटल अनुमानों और असल नुकसान के बीच बड़ा अंतर दिख रहा है, जिससे उनके मुआवजे में कटौती हो रही है।

बजट में कटौती का असर

किसानों की यह चिंता ऐसे समय में आई है जब सरकार इस सेक्टर को वित्तीय मदद कम कर रही है। 2025-26 के यूनियन बजट (Union Budget) में, फसल बीमा के लिए कुल आवंटन में पिछले साल के संशोधित अनुमानों (Revised Estimates) की तुलना में 23% की कटौती की गई है। इस कटौती से योजना की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि प्रीमियम सब्सिडी (Premium Subsidies) का बोझ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बंटता है। अक्सर राज्यों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी का उनका हिस्सा जारी करने में देरी होने से क्लेम सेटलमेंट में देरी होती है, जिससे बीमा के प्रति किसानों का भरोसा कम होता है।

बीमा सेक्टर पर प्रभाव

बीमा उद्योग के लिए, यह स्थिति स्वचालित प्रणालियों (Automated Systems) के माध्यम से ग्रामीण जोखिमों (Rural Risk) के प्रबंधन की जटिलताओं को उजागर करती है। डिजिटलीकरण (Digitization) धोखाधड़ी और प्रशासनिक लागत को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन एक पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) की कमी भरोसे की खाई को और गहरा कर सकती है। जब किसानों को समय पर या उचित भुगतान नहीं मिलता है, तो वे स्वेच्छा से बीमा कार्यक्रमों में भाग लेने की संभावना कम रखते हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में काम करने वाली बीमा कंपनियों के बिजनेस वॉल्यूम पर पड़ता है।

PMFBY के तहत, यदि फसल कटाई के दो महीने के भीतर क्लेम का निपटारा नहीं होता है तो बीमा कंपनियों पर 12% ब्याज जुर्माना लगाने का प्रावधान है। हालांकि, जब मूल्यांकन (Assessment) ही विवादित हो, तो इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करना एक चुनौती है। जैसे-जैसे राज्य 100% टेक्नोलॉजी-आधारित अनुमान मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, निवेशकों और हितधारकों के लिए मुख्य निगरानी यह होगी कि क्या सरकार इन AI मॉडलों को जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से पकड़ने और शिकायत निवारण की गति को बेहतर बनाने के लिए परिष्कृत कर सकती है। कृषि मंत्रालय से YES-TECH ढांचे की दक्षता और बीमा की पैठ पर बजट कटौती के प्रभाव के बारे में भविष्य के अपडेट सेक्टर की स्थिरता को ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.