लद्दाख में जैविक खेती की राह में खाद की कमी, केमिकल फर्टिलाइजर बैन का असर

AGRICULTURE
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
लद्दाख में जैविक खेती की राह में खाद की कमी, केमिकल फर्टिलाइजर बैन का असर

लद्दाख को पूरी तरह से जैविक (Organic) बनाने की मुहिम को बड़ा झटका लगा है। केमिकल फर्टिलाइजर्स पर बैन लगने के बाद अब राज्य में जैविक खाद की भारी कमी हो गई है। इससे ₹500 करोड़ की जैविक खेती योजना की राह मुश्किल हो गई है।

Detailed Coverage

केमिकल फर्टिलाइजर पर बैन का असर

लद्दाख प्रशासन ने यूनियन टेरिटरी (UT) को पूरी तरह से जैविक क्षेत्र बनाने के लिए केमिकल फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह कदम 2020 में शुरू हुई 'मिशन ऑर्गेनिक डेवलपमेंट इनिशिएटिव' (MODI) का अहम हिस्सा है, जिसके तहत ₹500 करोड़ खर्च करके 666 गांवों को ऑर्गेनिक हब बनाने का लक्ष्य है। इस पहल का मकसद हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना और खुबानी, अखरोट और जौ जैसी स्थानीय फसलों को प्रीमियम मार्केट में पहुंचाना है। लेकिन, इस बैन से किसानों के बीच तुरंत परिचालन संबंधी चिंताएं पैदा हो गई हैं।

पारंपरिक खेती पर प्रभाव

लद्दाख की खेती दशकों से पशुओं के गोबर और पारंपरिक ड्राई टॉयलेट्स से निकलने वाली खाद पर निर्भर रही है। लेकिन, स्वच्छता प्रणालियों के आधुनिकीकरण और ग्रामीण आबादी में बदलाव के कारण खाद के ये पारंपरिक स्रोत कम हो गए हैं। किसानों का कहना है कि 1980 के दशक से इस्तेमाल हो रहे केमिकल इनपुट्स पर अब कानूनी रूप से रोक लगने के बाद, जैविक खाद की मौजूदा सप्लाई फसल की पैदावार बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में, अगर वैकल्पिक सप्लाई चेन को तेजी से नहीं बढ़ाया गया तो पैदावार में कमी का खतरा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और सप्लाई लॉजिस्टिक्स

इस कमी को पूरा करने के लिए, प्रशासन सहकारी समितियों (Cooperatives) के जरिए सब्सिडी वाली जैविक खाद बांट रहा है। गांव के मुखिया स्थानीय जरूरतों को अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं, जिन्हें इन सहकारी समितियों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। MODI कार्यक्रम की सफलता अब इस वितरण नेटवर्क की क्षमता पर टिकी है। चूंकि यह बैन पूरे क्षेत्र में लागू है, इसलिए इन सहकारी समितियों से सप्लाई होने वाली खाद की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सप्लाई में रुकावट न आए, इसके लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी दबाव पड़ने वाला है।

जैविक बदलाव की राह की चुनौतियां

आगे चलकर, लद्दाख की जैविक पहचान की सफलता सिर्फ केमिकल फर्टिलाइजर्स को प्रतिबंधित करने से कहीं बढ़कर होगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को बायो-फर्टिलाइजर इकाइयों की क्षमता काफी बढ़ानी होगी और खाद उत्पादन बढ़ाने के स्थायी तरीके खोजने होंगे। अगर जैविक इनपुट्स की सप्लाई ऊंचाई वाले इलाकों की खेती की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती है, तो पैदावार में अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है। कृषि क्षेत्र के निवेशक और हितधारक इस बात पर नजर रखेंगे कि प्रशासन जैविक बदलाव की तेज समय-सीमा को इनपुट उपलब्धता की व्यावहारिक सीमाओं के साथ कैसे संतुलित करता है। अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बड़े पैमाने पर कंपोस्ट उत्पादन को सफलतापूर्वक कैसे प्रोत्साहित करती है और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए इसे मौजूदा सहकारी सप्लाई फ्रेमवर्क के साथ कैसे एकीकृत करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.