Kothari Industrial Corporation Limited को अपने कृषि ड्रोन KOAIR-10L के लिए DGCA से टाइप सर्टिफिकेट मिल गया है। इस मंजूरी के साथ कंपनी अब भारत में कमर्शियल सेल शुरू कर सकेगी, हालांकि कमजोर फाइनेंशियल परफॉर्मेंस अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
ड्रोन बाजार में नई दस्तक
चेन्नई की कंपनी Kothari Industrial Corporation Limited ने 9 अक्टूबर, 2026 को अपने KOAIR-10L हेक्साकॉप्टर के लिए DGCA से टाइप सर्टिफिकेट हासिल किया है। यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि कंपनी का ड्रोन भारत में इस्तेमाल के लिए सभी जरूरी सेफ्टी और ऑपरेशनल मानकों पर खरा उतरता है।
कमर्शियल स्ट्रेटेजी
यह 10-लीटर टैंक क्षमता वाला मीडियम-क्लास अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम है, जिसे खेती में कीटनाशकों के ऑटोमेटेड छिड़काव के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का लक्ष्य इसके जरिए किसानों की मेहनत को कम करना और कार्यक्षमता बढ़ाना है। साथ ही, कंपनी ने एक 'रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन' चलाने की भी मंजूरी ले ली है, जो दिखाता है कि कंपनी ड्रोन सेल्स के साथ-साथ ट्रेनिंग सेक्टर में भी अपना दबदबा बनाना चाहती है।
फाइनेंशियल हेल्थ और चुनौतियां
कंपनी भले ही नई टेक्नोलॉजी में कदम रख रही है, लेकिन हालिया फाइनेंशियल आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। जून 2026 की तिमाही में कंपनी को ₹28.90 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए यह घाटा बढ़कर ₹72.18 करोड़ हो गया है। इस दबाव के पीछे Phoenix Kothari Footwear Private Limited में हो रहे नुकसान को एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
फिलहाल, कंपनी का पूरा फोकस अपने बिजनेस मॉडल को बदलने पर है, लेकिन ये नए वेंचर्स अभी काफी कैपिटल-इंटेंसिव हैं और नेगेटिव ऑपरेटिंग मार्जिन पर काम कर रहे हैं। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह देखना है कि क्या ड्रोन का बिजनेस कंपनी की बैलेंस शीट को पटरी पर लाने में सक्षम होगा या अन्य सेगमेंट का घाटा मुनाफे की राह में बाधा बना रहेगा।
