देश में खरीफ की बुवाई उम्मीद से काफी पीछे चल रही है। अब तक केवल **3.5 करोड़ हेक्टेयर** में बुवाई हुई है, जो पिछले साल इसी अवधि के **4.43 करोड़ हेक्टेयर** से **20%** कम है। जून में **40%** की बारिश की कमी, जो अल नीनो (El Niño) की वजह से है, ने मुख्य फसलों की बुवाई में देरी कर दी है। इससे खाद्य उत्पादन और घरेलू खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की चिंता है।
खरीफ बुवाई में आई 20% की कमी
भारत में खरीफ फसलों की बुवाई का सीजन उम्मीद से काफी धीमा शुरू हुआ है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक केवल 3.5 करोड़ हेक्टेयर (35 million hectares) में बुवाई हो पाई है। यह पिछले साल इसी अवधि के 4.43 करोड़ हेक्टेयर (44.3 million hectares) के मुकाबले 20% की गिरावट को दर्शाता है।
बारिश की कमी का असर
इस देरी की मुख्य वजह देश के प्रमुख कृषि राज्यों में बारिश की कमी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि जून में सामान्य से 40% कम बारिश हुई, जो पिछले 100 सालों का पांचवां सबसे सूखा जून रहा। यह स्थिति अल नीनो (El Niño) के बढ़ने के साथ-साथ हो रही है, जिसका भारत में मॉनसून पर नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे में, जुलाई की बारिश भी इस कमी को पूरी तरह से पूरा कर पाएगी, यह कहना मुश्किल है।
फसलों पर गहरा असर
लगभग सभी मुख्य फसलों की बुवाई में कमी देखी गई है। चावल, जो सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल है, में 0.9 करोड़ हेक्टेयर की कमी आई है, बुवाई अब 60 लाख हेक्टेयर (6 million hectares) पर है। दालों की बुवाई घटकर 37 लाख हेक्टेयर (3.7 million hectares) रह गई है, जो पिछले साल 47 लाख हेक्टेयर (4.7 million hectares) थी। तिलहन (Oilseeds) में सबसे ज्यादा गिरावट आई है, बुवाई 40% घटकर केवल 66 लाख हेक्टेयर (6.6 million hectares) रह गई है। ये फसलें भारत की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
सिंचित न होने वाले क्षेत्रों के लिए खतरा
भारत का लगभग 60% शुद्ध बोया गया क्षेत्र सिंचाई के बजाय बारिश पर निर्भर करता है। ऐसे में, मौजूदा मौसम की स्थिति कृषि उत्पादन के लिए सीधी चुनौती पेश कर रही है। कृषि मंत्रालय ने 111 जिलों को हाई-रिस्क जोन में रखा है, जहां सिंचाई की सुविधा 25% से भी कम है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों के ये इलाके सूखे के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
निवेशकों के लिए क्या है महत्वपूर्ण
कृषि क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले असर की है। निवेशक जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश पर पैनी नज़र रखेंगे, क्योंकि ये महीने बुवाई की गति को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, उर्वरक, बीज, फार्म उपकरण और ग्रामीण आय पर निर्भर उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि मॉनसून सुधरता है या नहीं। सरकार की ओर से बुवाई क्षेत्र पर अगला अपडेट यह बताएगा कि कृषि क्षेत्र इस कमी को कितना पूरा कर पाता है।
