Kharif Sowing: बारिश की कमी के बावजूद बुवाई का रकबा पहुंचा 658 लाख हेक्टेयर

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Kharif Sowing: बारिश की कमी के बावजूद बुवाई का रकबा पहुंचा 658 लाख हेक्टेयर

17 जुलाई तक भारत में खरीफ फसलों की बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जिससे बुवाई का रकबा (acreage) में कमी काफी हद तक कम हो गई है। हालांकि, 23.8% की बारिश की कमी बनी हुई है, लेकिन मिट्टी में नमी बढ़ने और धान व दलहन की बुवाई में सुधार ने स्थिति को स्थिर किया है। ऐसे में निवेशकों की नजर फसल की पैदावार और खाद्य मुद्रास्फीति पर रहेगी।

Detailed Coverage

बुवाई के रकबे में आई तेजी

भारतीय कृषि एक बार फिर मजबूत स्थिति दिखा रही है। 17 जुलाई के खरीफ बुवाई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में बुवाई के रकबे में आई कमी काफी हद तक कम हो गई है। कुल बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह प्रगति इसलिए भी खास है क्योंकि यह 19 जुलाई तक 23.8% की कुल बारिश की कमी के बावजूद हुई है।

बुवाई में जो कमी एक हफ्ते पहले 100 लाख हेक्टेयर से अधिक थी, वह अब घटकर 42.28 लाख हेक्टेयर रह गई है। यह बड़ी फसलों में बुवाई की तेज रफ्तार को दर्शाता है।

फसल प्रदर्शन और सुधार

इस सीजन में धान की बुवाई एक अहम सहारा बनकर उभरी है। कुल रकबा 166.41 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज 167.83 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर है। इससे कमी घटकर सिर्फ 1.41 लाख हेक्टेयर रह गई है।

दलहन (Pulses) में भी सुधार देखा गया है, जिसमें अरहर और उड़द की बेहतर बुवाई के चलते रकबा बढ़कर 69.23 लाख हेक्टेयर हो गया है। मोटे अनाज (Coarse cereals) और तिलहन (oilseeds) अभी भी 2025 के स्तर से पीछे चल रहे हैं, लेकिन उनकी कमी की तीव्रता काफी कम हुई है, क्योंकि किसान अंकुरण के लिए मिट्टी की नमी का फायदा उठा रहे हैं।

गन्ना (Sugarcane) एक प्रमुख फसल बनी हुई है, जिसका रकबा इस समय पिछले साल के स्तर से अधिक है। पानी की अधिक खपत वाली यह फसल, कम बारिश के बावजूद उत्पादन बनाए रखने में सिंचाई और नमी प्रबंधन की अहम भूमिका को दर्शाती है।

मौसम का पूर्वानुमान और आर्थिक असर

आगे की बात करें तो, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहे एक ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के समर्थन से पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि, अल नीनो (El Nino) की स्थिति बने रहने की उम्मीद है, जो पूरे सीजन तक जारी रह सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, ये विकास खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण हैं। उम्मीद से कम बुवाई से आवश्यक खाद्य पदार्थों पर सप्लाई का दबाव बनता है, जिससे FMCG और एग्रो-प्रोसेसिंग कंपनियों की लागत प्रभावित होती है। वहीं, रकबे में निरंतर सुधार से कमोडिटी की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है। निवेशकों को आने वाले हफ्तों में क्षेत्रीय वर्षा वितरण के आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अंतिम फसल उत्पादन मानसून की बारिश के स्थानिक और अस्थायी फैलाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.