Kharif Crops: MSP से ऊपर बिक रही हैं अधिकांश फसलें, लेकिन बाजरा और मूंग ने बढ़ाई चिंता

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Kharif Crops: MSP से ऊपर बिक रही हैं अधिकांश फसलें, लेकिन बाजरा और मूंग ने बढ़ाई चिंता

साल 2026 की खरीफ फसलें मंडियों में पहुंच चुकी हैं। राहत की बात यह है कि **14** में से **9** प्रमुख फसलें सरकारी एमएसपी (MSP) या उससे ऊपर बिक रही हैं, लेकिन बाजरा और मूंग की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

एग्रीकल्चर मार्केट में इस समय कीमतों को लेकर मिली-जुली तस्वीर देखने को मिल रही है। मक्का, ज्वार, तुअर, उड़द और सोयाबीन जैसी कमोडिटी की सप्लाई कम होने के कारण इनकी कीमतों में मजबूती बनी हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर है।

बाजरा और मूंग में सुस्ती

बाजार में हर फसल का हाल एक जैसा नहीं है। बाजरा और मूंग की कीमतें अपने एमएसपी (MSP) से काफी नीचे कारोबार कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बाजरा 31% और मूंग 13% तक डिस्काउंट पर बिक रहे हैं। मूंग में कमजोरी की बड़ी वजह सरकारी एजेंसियों द्वारा स्टॉक को खपाना (stock disposal) है, जिससे सप्लाई बढ़ गई है और दाम गिर रहे हैं।

पैडी (Paddy) प्रोक्योरमेंट का गणित

धान (Paddy) के बाजार पर सबकी नजरें टिकी हैं। सरकारी एमएसपी ₹2,441 प्रति क्विंटल (कॉमन) और ₹2,461 प्रति क्विंटल (ग्रेड-ए) तय की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह ₹1,965 प्रति क्विंटल के आसपास मिल रही है। कुल उत्पादन का लगभग 40% सरकारी प्रोक्योरमेंट के जरिए खरीदा जाता है, इसलिए सरकारी एजेंसियों की रफ्तार तय करेगी कि क्या किसानों को एमएसपी का पूरा फायदा मिल पाएगा या नहीं।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

खरीफ बुआई का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में 2% घटा है, जिसमें एल-नीनो (El-Nino) का असर साफ दिख रहा है। निवेशकों के लिए यह सेक्टर रूरल हेल्थ और इन्फ्लेशन ट्रेंड्स को समझने का एक बड़ा पैमाना है। किसानों की आय का सीधा असर एफएमसीजी (FMCG), फर्टिलाइजर और एग्रो-केमिकल कंपनियों की डिमांड पर पड़ता है। बाजार में अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार कितनी तेजी से प्रोक्योरमेंट बढ़ाती है और रूरल डिमांड में क्या सुधार आता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.