केरल का सीफूड (Seafood) उद्योग एक साल के अंदर मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल (MSC) सर्टिफिकेशन हासिल करने के लिए एक नया रोडमैप लेकर आया है। डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त फिशिंग गियर स्टैंडर्ड्स को अपनाकर, राज्य का लक्ष्य एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Export Competitiveness) को बढ़ाना और प्रीमियम इंटरनेशनल मार्केट्स (International Markets) में बेहतर पहुंच बनाना है।
डिजिटल ट्रैकिंग और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स
केरल के सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) इंडस्ट्री में ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स (Global Sustainability Standards) को पूरा करने के लिए एक बड़ा बदलाव आ रहा है। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) ने सरकारी अधिकारियों और मरीन साइंटिस्ट्स (Marine Scientists) के साथ मिलकर एक नया स्टेट फिशरीज मैनेजमेंट प्लान (State Fisheries Management Plan) पेश किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अगले 12 महीनों के भीतर राज्य की मुख्य झींगा (Shrimp) और सेफलोपॉड (Cephalopod) फिशरीज के लिए मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल (MSC) सर्टिफिकेशन प्राप्त करना है।
इस रोडमैप का सेंट्रल गोल केरल के सीफूड प्रोडक्शन को इंटरनेशनल रिटेलर्स (International Retailers) की ज़रूरतों के मुताबिक बनाना है, जो तेजी से सर्टिफाइड और रिस्पॉन्सिबली सोर्स (Responsibly Sourced) प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसे हासिल करने के लिए, मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) अगले महीने से सभी लोकल फिश डीलर्स (Fish Dealers) और एग्रीगेटर्स (Aggregators) के लिए मैंडेटरी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (Mandatory Online Registration) शुरू करेगी। यह सिस्टम कोस्टल लैंडिंग सेंटर्स (Coastal Landing Centers) से प्रोसेसिंग फैसिलिटीज (Processing Facilities) तक सप्लाई चेन को ट्रैक करने के लिए एक ट्रांसपेरेंट डिजिटल ऑडिट ट्रेल (Digital Audit Trail) बनाएगा।
फुल ट्रेसेबिलिटी (Full Traceability) सुनिश्चित करके, एक्सपोर्टर्स को उम्मीद है कि वे हाई-वैल्यू इंटरनेशनल मार्केट्स, खासकर यूनाइटेड स्टेट्स (United States) में अपनी पोजिशन बेहतर कर पाएंगे। गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों में इसी तरह की पहलों ने पहले ही दिखा दिया है कि ग्लोबल बेंचमार्क्स (Global Benchmarks) के साथ अलाइनमेंट, जैसे टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (Turtle Excluder Devices - TEDs) का उपयोग, वाइल्ड-कॉट्स श्रिंप (Wild-caught Shrimp) के लिए प्रतिबंधित ट्रेड कॉरिडोर (Trade Corridors) खोल सकता है।
ऑपरेशनल बदलाव और टेक्नोलॉजी
मैनेजमेंट प्लान में ICAR-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-Central Marine Fisheries Research Institute) द्वारा विकसित साइंस-बेक्ड रेगुलेशन (Science-backed Regulations) पेश किए गए हैं। मुख्य बदलावों में स्क्वायर-मेश कॉडेंड्स (Square-mesh codends) और अन्य गियर रेस्ट्रिक्शन्स (Gear Restrictions) का मैंडेटरी यूज़ शामिल है। इन एडजस्टमेंट्स का मकसद जुवेनाइल फिश (Juvenile Fish) के पकड़े जाने को रोकना और नॉन-टारगेट बाय-कैच (Non-target By-catch) को कम करना है, जिससे अरेबियन सी (Arabian Sea) में मरीन स्टॉक्स (Marine Stocks) के हेल्थ को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जहां ये मेजर्स लॉन्ग-टर्म एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी (Long-term Environmental Sustainability) सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वहीं फिशिंग फ्लीट (Fishing Fleet) के लिए ऑपरेशनल एडजस्टमेंट्स की भी ज़रूरत पड़ेगी। डिजिटल ट्राउल फुटप्रिंट ट्रैकिंग (Digital Trawl Footprint Tracking) और मोबाइल एनफोर्समेंट एप्लीकेशन्स (Mobile Enforcement Applications) का इंटीग्रेशन लोकल इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण शिफ्ट का प्रतिनिधित्व करता है। इन अपग्रेड्स और सर्टिफिकेशन कॉस्ट्स (Certification Costs) के लिए फंडिंग पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (Public Sector Enterprises) से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कंट्रीब्यूशन्स और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana - PMMSY) जैसी सरकारी पहलों के मिक्स से आने की उम्मीद है।
जोखिम और इंडस्ट्री पर प्रभाव
सीफूड एक्सपोर्ट सेक्टर की निगरानी करने वाले इन्वेस्टर्स (Investors) के लिए, ट्रांजीशन में अवसर और चुनौतियां दोनों शामिल हैं। सफल सर्टिफिकेशन से बेहतर प्राइसिंग (Pricing) और व्यापक मार्केट एक्सेस (Market Access) मिल सकती है, लेकिन इसमें इम्प्लीमेंटेशन रिस्क (Implementation Risks) भी हैं। छोटे ऑपरेटर्स (Small-scale Operators) के लिए कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Costs) ज्यादा हो सकती है, और यह संभावना है कि फिश स्टॉक्स के रिकवर होने तक सख्त गियर रेस्ट्रिक्शन्स से इनिशियल कैच वॉल्यूम (Catch Volumes) कम हो सकता है। इसके अलावा, इंडस्ट्री इंटरनेशनल ट्रेड रेगुलेशन (International Trade Regulations) के प्रति संवेदनशील बनी हुई है, जैसे प्रमुख कंज्यूमिंग नेशंस (Consuming Nations) द्वारा इम्पोर्ट टैरिफ (Import Tariffs) में संभावित बदलाव, जो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड बिजनेस (Export-oriented businesses) की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को प्रभावित कर सकते हैं। सेक्टर के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार द्वारा प्लान का फाइनल एंडोर्समेंट (Final Endorsement) और अगले महीने मैंडेटरी डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Mandatory Digital Registration System) का सफल रोलआउट होगा।
