केरल सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए नई पॉलिसी पेश की है। इसके तहत AI मॉनिटरिंग सिस्टम और किसानों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि प्लांटेशन सेक्टर को आर्थिक स्थिरता मिल सके।
केरल सरकार ने 'Containment, Mitigation and Compensation' (CMC) पॉलिसी लॉन्च की है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्रों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना है। इस नीति के तहत, जंगल की सीमाओं पर AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो जानवरों की हलचल की सूचना पहले ही दे देंगे। साथ ही, सरकार प्राकृतिक घास के मैदानों को बहाल करने पर भी काम करेगी ताकि जानवर अपने प्राकृतिक आवास में ही रहें।
मुआवजे की नई राह
अब तक फसल के नुकसान पर मिलने वाला मुआवजा काफी देरी से आता था, लेकिन नई पॉलिसी इसे एक इंश्योरेंस मॉडल की तरह पेश कर रही है। इससे मुआवजे का भुगतान तेजी से और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। इसके अलावा, लैंड एक्विजिशन (Land acquisition) को भी मुआवजे के साथ जोड़ा गया है।
प्लांटेशन सेक्टर की चुनौतियां
Association of Planters of Kerala (APK) की 87वीं वार्षिक बैठक में यह मुद्दा उठा कि बढ़ते प्रोडक्शन खर्च और क्लाइमेट चेंज के कारण मुनाफे पर दबाव है। अब प्लांटर्स गैर-पारंपरिक गतिविधियों जैसे एग्रो-फॉरेस्ट्री और टूरिज्म के लिए जमीन के उपयोग को 5% से बढ़ाकर 30% करने की मांग कर रहे हैं।
साथ ही, इंडस्ट्री इस संघर्ष को 'स्टेट डिजास्टर' (State Disaster) घोषित करने की मांग कर रही है, जिससे राज्य सरकार से अतिरिक्त फंडिंग और कानूनी सुरक्षा मिल सके। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार ESZ (Eco-Sensitive Zone) के नियमों और लैंड डाइवर्सिफिकेशन पर क्या फैसला लेती है।
