केरल में मछुआरों का विरोध: डीप-सी फिशिंग पास के लिए ₹25,000 की फीस पर हंगामा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
केरल में मछुआरों का विरोध: डीप-सी फिशिंग पास के लिए ₹25,000 की फीस पर हंगामा

केरल के मछुआरे केंद्र सरकार की नई डीप-सी फिशिंग एक्सेस पास प्रणाली का विरोध कर रहे हैं, जिसमें हर नाव से ₹25,000 की फीस ली जा रही है। मछुआरे संगठनों का कहना है कि यह छोटे ऑपरेटरों के लिए अनुचित है और उन्हें डर है कि इससे बड़ी कंपनियां भारतीय जलक्षेत्र में आसानी से प्रवेश कर सकती हैं। मानसून के दौरान अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर भी चिंता जताई गई है, जिससे समुद्री जीवन को खतरा हो सकता है।

₹25,000 की फीस पर मछुआरों का गुस्सा

केरल के मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार की उस नई नीति का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत डीप-सी फिशिंग (गहरे समुद्र में मछली पकड़ने) के लिए अब एक्सेस पास लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई प्रणाली के तहत, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में 200 नॉटिकल मील से आगे मछली पकड़ने वाले जहाजों को ₹25,000 की फीस देनी होगी।

हालांकि छोटी ट्रावल नावों को इस शुल्क से छूट दी गई है, लेकिन मछुआरा प्रतिनिधि संगठनों का कहना है कि ऐसी कई डीप-सी नावें हैं जो अभी भुगतान वाली श्रेणी में आती हैं, लेकिन असल में वे छोटे पैमाने पर काम करती हैं और उन्हें भी फीस में छूट मिलनी चाहिए।

बड़ी कंपनियों के प्रवेश का डर

ऑल इंडिया डीप सी फिशर्स एसोसिएशन (All India Deep Sea Fishers Association) ने इस फीस स्ट्रक्चर की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह छोटे मछुआरों पर एक अनावश्यक वित्तीय बोझ डाल रहा है। फीस से भी बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह नीति बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को भारतीय जलक्षेत्र में आसानी से घुसपैठ करने का रास्ता न दे दे। उद्योग के प्रतिनिधियों का तर्क है कि यदि इस नीति को ठीक से नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह उन क्षेत्रों पर औद्योगिक स्तर के संचालन का दबदबा बना सकती है जो पारंपरिक रूप से स्थानीय मछुआरों के प्रबंधन में रहे हैं। इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर खतरा मंडरा सकता है।

मानसून के दौरान अवैध मछली पकड़ने का मुद्दा

फीस के अलावा, फेडरेशन ऑफ फिशिंग बोट्स एंड फिशरी इंडस्ट्रीज ऑफ केरल (Federation of Fishing Boats and Fishery Industries of Kerala) ने वार्षिक मानसून मछली पकड़ने पर लगी रोक के प्रवर्तन पर भी चिंता जताई है। यह मौसमी प्रतिबंध समुद्री संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मछलियों की आबादी को उनके प्रजनन काल के दौरान फिर से बढ़ने का मौका देता है।

फेडरेशन का आरोप है कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली 3,000 से अधिक फाइबर बोट, शक्तिशाली 50 HP इंजन का उपयोग करके, प्रतिबंधित अवधि के दौरान गहरे समुद्र क्षेत्रों में मछली पकड़ रही हैं। सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (Central Marine Fisheries Research Institute) के निष्कर्षों के अनुसार, यदि ये नावें मानसून के दौरान काम करना जारी रखती हैं, तो मछलियों के स्टॉक में भारी कमी आ सकती है, जिससे प्रतिबंध समाप्त होने के बाद सभी मछुआरों की कमाई प्रभावित होगी। उद्योग निकायों ने राज्य के मत्स्य पालन मंत्री से हस्तक्षेप करने, कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि अवैध या अनियंत्रित गतिविधियों से संरक्षण लक्ष्यों से समझौता न हो।

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