कश्मीर में पड़ रही भीषण गर्मी और सूखे के चलते केसर की खेती संकट में है। श्रीनगर में तापमान **31.2°C** तक पहुंचने से फसल के फ्लोवरिंग सीजन पर बुरा असर पड़ा है, जिससे आने वाले समय में सप्लाई कम होने का जोखिम पैदा हो गया है।
कश्मीर घाटी में इस साल बेमौसम गर्मी ने केसर (Saffron) की फसल के चक्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। 4 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर का तापमान 31.2°C दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र के लिए असामान्य है। केसर का पौधा अपनी फ्लोवरिंग स्टेज के दौरान बेहद संवेदनशील होता है, जो आमतौर पर 10 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होती है।
फसल क्यों है खतरे में?
केसर के सही उत्पादन के लिए ठंडे तापमान और नमी की आवश्यकता होती है। मौजूदा सूखे के कारण मिट्टी में नमी की भारी कमी हो गई है, जिससे भूमिगत कॉर्म्स (corms) के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। खेती के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1990 के दशक में जहां 5,700 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर केसर की खेती होती थी, वहीं 2019-20 तक यह घटकर मात्र 2,387 हेक्टेयर रह गई है।
बाजार पर असर
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि भारत में केसर की खेती पूरी तरह से असंगठित और छोटे किसानों द्वारा की जाती है। NSE या BSE पर ऐसी कोई बड़ी लिस्टेड कंपनी नहीं है जो सीधे तौर पर कश्मीर के केसर के कारोबार से जुड़ी हो। ध्यान दें, 'Saffron Industries Ltd' जैसी कंपनियां पेपर और न्यूजप्रिंट क्षेत्र में हैं, जिनका स्पाइस मार्केट से कोई लेना-देना नहीं है।
हालांकि, कोई सीधा इक्विटी प्रभाव न होने के बावजूद, यह संकट एग्रीकल्चरल कमोडिटी सेक्टर के लिए एक बड़े जोखिम की घंटी है। यदि उत्पादन में भारी कमी आती है, तो फूड प्रोसेसर और एक्सपोर्टर्स के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। आने वाले हफ्तों में फसल की कटाई के दौरान मिलने वाले वॉल्यूम पर सभी की नजरें रहेंगी, क्योंकि सप्लाई कम होने से इसके दाम में उछाल आ सकता है।
