Kashmir Saffron: सितंबर की भीषण गर्मी और सिंचाई संकट से केसर की फसल पर मंडराया खतरा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Kashmir Saffron: सितंबर की भीषण गर्मी और सिंचाई संकट से केसर की फसल पर मंडराया खतरा

कश्मीर में इस सितंबर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और फेल हो चुके सिंचाई सिस्टम के कारण केसर की फसल खतरे में है। पम्पोर (Pampore) जैसे प्रमुख केंद्रों में उत्पादन घटने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

फसल पर मंडराता संकट

कश्मीर घाटी के किसान सितंबर महीने में पड़ रही असामान्य गर्मी और सूखे से परेशान हैं। यह मौसम केसर के फूलों के लिए बेहद नाजुक होता है। आपको बता दें कि भारत की कुल केसर सप्लाई का करीब 90% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। अक्टूबर में फूल आने का मुख्य समय है, लेकिन नमी की कमी और लू के कारण इस बार फसल की पैदावार पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

सरकारी दावों की पोल

यह संकट सरकार की कृषि नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े गैप को दिखाता है। पम्पोर क्षेत्र के किसानों की मदद के लिए शुरू किया गया 'नेशनल सैफरन मिशन' (National Saffron Mission) फिलहाल सवालों के घेरे में है। सरकार द्वारा लगाए गए ड्रिप सिंचाई सिस्टम या तो खराब हैं या काम ही नहीं कर रहे हैं, जिससे किसान बेमौसम बारिश और गर्मी के सामने लाचार नजर आ रहे हैं।

मार्केट और कीमतों पर असर

केसर के उत्पादन में लगातार गिरावट का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक दशक में जमीन के अतिक्रमण और खराब क्वॉलिटी के बीजों के चलते पैदावार कम हुई है। कमोडिटी मार्केट के जानकारों का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर सप्लाई कम होती है, तो इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा और दाम बढ़ सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही ईरान जैसे देशों के तनाव के कारण केसर की कीमतें अस्थिर रहती हैं। स्थानीय स्तर पर सप्लाई शॉक लगने से यह समस्या और जटिल हो सकती है। छोटे किसानों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि उनकी सालाना कमाई का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर टिका होता है। अब सबकी नजरें बाकी बचे सितंबर के मौसम पर हैं, कि क्या बारिश से फसल को राहत मिल पाएगी या उत्पादन में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.