जम्मू-कश्मीर के बागवानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। कश्मीर से **1 टन** प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप सीधे **UAE** के बाजारों में पहुंची है। APEDA के सहयोग से हुए इस एक्सपोर्ट से स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपज बेचने का एक नया रास्ता मिला है।
कश्मीर के बागवानों की बल्ले-बल्ले!
जम्मू-कश्मीर का बागवानी क्षेत्र (Horticulture Sector) एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कश्मीर से 1 टन प्रीमियम चेरी (Aerko cherries) और प्लम (Scentrose plums) की पहली खेप सीधे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी और दुबई जैसे बड़े बाजारों में भेजी गई है। इस एक्सपोर्ट को एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) ने हरी झंडी दिखाई है, जिसका मकसद स्थानीय किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाना है।
नई तकनीक और कोल्ड स्टोरेज का कमाल
यह एक्सपोर्ट कश्मीर के खेती के तरीके में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है। अब पारंपरिक खेती से हटकर हाई-डेंसिटी प्लांटेशन (High-density plantation) पर जोर दिया जा रहा है। कश्मीर में फिलहाल लगभग 3,000 हेक्टेयर जमीन पर चेरी की खेती होती है, जिससे सालाना 23,100 टन से ज्यादा उपज मिलती है। भारत की कुल चेरी उपज का लगभग 95% अकेले कश्मीर से आता है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में करीब ₹175 करोड़ का योगदान देता है। इस दिशा में 'होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम' (HADP) जैसे सरकारी कदम किसानों की आमदनी बढ़ाने और फसल को मौसम की मार से बचाने में मदद कर रहे हैं।
लॉजिस्टिक्स की चुनौती और समाधान
चेरी और प्लम जैसे फलों की खास बात यह है कि ये बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं। इसलिए, इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स (Cold-chain logistics), अच्छी ग्रेडिंग और खास पैकिंग की जरूरत होती है। 'फ्रूट मास्टर' (Fruit Master) कंपनी ने इसी पर काम किया है। कंपनी किसानों को बेहतर किस्म के पौधे और आधुनिक बागवानी तकनीक की ट्रेनिंग दे रही है। शुरुआत से लेकर आखिर तक क्वालिटी कंट्रोल करके, कंपनी का लक्ष्य बर्बादी कम करना और विदेशी बाजारों में अच्छी कीमत हासिल करना है।
आगे क्या?
यह पहला एक्सपोर्ट एक बड़ी शुरुआत है, लेकिन इसका असली असर कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर तब दिखेगा जब यह बड़े पैमाने पर हो सकेगा। निवेशकों और जानकारों की नजर इस पर रहेगी कि क्या यह पहल किसानों को घरेलू बाजार से ज्यादा कमाई दे पाएगी। इसके अलावा, फलों की क्वालिटी को ट्रांजिट के दौरान बनाए रखना, कश्मीर में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाना और दूसरे देशों के सख्त नियमों का पालन करना जैसी चीजें अहम होंगी। अगर UAE से दोबारा ऑर्डर आते हैं और मध्य पूर्व के दूसरे बाजारों में भी यह पहल फैलती है, तो यह कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी वित्तीय सफलता साबित हो सकती है।
