जम्मू-कश्मीर में सूखे का साया: सेब और धान की फसलों पर मंडराया खतरा, बारिश का 83% तक घाटा

AGRICULTURE
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AuthorAditya Rao|Published at:
जम्मू-कश्मीर में सूखे का साया: सेब और धान की फसलों पर मंडराया खतरा, बारिश का 83% तक घाटा

जम्मू और कश्मीर में इस समय भयंकर सूखे जैसे हालात हैं। कुछ जिलों में तो सामान्य से **83%** कम बारिश हुई है। इस शुष्क मौसम के कारण क्षेत्र की अहम सेब और धान की फसलें खतरे में पड़ गई हैं, जिससे इस सीजन में फलों की गुणवत्ता और पैदावार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

सेब के बागानों और गुणवत्ता पर असर

जम्मू और कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार सेब की खेती है, जिससे सालाना 20 से 22 लाख टन तक पैदावार होती है। नमी की मौजूदा कमी फलों के विकास के एक महत्वपूर्ण चरण के दौरान हो रही है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, नमी के तनाव से फलों में दरारें पड़ने और 'लेंटिकेल ब्लॉच' जैसी शारीरिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। ये स्थितियां, उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही, उपज के बाजार मूल्य को काफी कम कर सकती हैं, क्योंकि सूखे माहौल के कारण फल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

धान के खेतों में पानी की कमी

सेब के बागों के अलावा, कश्मीर के मुख्य खाद्य फसल, धान को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुलगाम जिले में सिंचाई के लिए पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे वाई के पोरा और चुरात जैसे इलाकों में खेत सूख रहे हैं और जमीन में दरारें पड़ रही हैं। फसल के और नुकसान को रोकने के लिए किसानों को तत्काल सिंचाई की सख्त जरूरत है। चूंकि कश्मीर घाटी में लगभग 3.5 मिलियन (35 लाख) लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है, इसलिए इन फसलों का प्रदर्शन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।

मौसम का पूर्वानुमान और आगे क्या?

किसानों और अन्य हितधारकों के लिए तत्काल चिंता यह है कि स्थिति कब सुधरेगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान लगाया है कि बारिश 19 जुलाई के आसपास शुरू हो सकती है, और 21 से 22 जुलाई के बीच इसके तेज होने की संभावना है। निवेशक और स्थानीय बाजार प्रतिभागी इन मौसम पैटर्न पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि अंतिम फसल उत्पादन और फलों की गुणवत्ता आने वाले महीनों में बाजार की कीमतों और व्यापार की मात्रा को निर्धारित करेगी। वर्षा में किसी भी देरी से बागानों और धान के खेतों में मौजूदा संकट और बढ़ सकता है, जिससे कटाई के मौसम के लिए उपलब्ध कुल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.