Kashmir Apple Market: NAFED की स्कीम बंद, क्या सेब के भाव में आएगी बड़ी गिरावट?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Kashmir Apple Market: NAFED की स्कीम बंद, क्या सेब के भाव में आएगी बड़ी गिरावट?

NAFED ने 'मार्केट इंटरवेंशन स्कीम' (Market Intervention Scheme) को बंद कर दिया है, जिससे कश्मीर में सेबों की बिक्री पूरी तरह से प्राइवेट ट्रेडर्स के भरोसे आ गई है। सालान **20 लाख टन** उत्पादन वाले इस क्षेत्र के किसानों के लिए अब कोई सरकारी प्राइस फ्लोर न होने से कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का खतरा बढ़ गया है।

सरकारी सपोर्ट का सहारा खत्म

कश्मीर का सेब उद्योग एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। अब तक, NAFED की ओर से चलाई जाने वाली 'मार्केट इंटरवेंशन स्कीम' किसानों के लिए एक ढाल का काम करती थी। यह सरकारी प्रोग्राम एक 'प्राइस फ्लोर' (न्यूनतम मूल्य) तय करता था, जिससे क्षेत्रीय संकट या बंपर पैदावार के समय किसानों की कमाई सुरक्षित रहती थी। अब इस व्यवस्था के हटने से किसानों को अपना माल केवल प्राइवेट होलसेलर्स और स्थानीय एग्रीगेटर्स को ही बेचना होगा।

बाजार की बदली चाल

क्षेत्र में हर साल करीब 20 लाख टन सेब का उत्पादन होता है। पुरानी व्यवस्था में NAFED हर तरह के ग्रेड के सेब खरीदती थी, जिससे मार्केट में सप्लाई ज्यादा होने पर भी कीमतें धड़ाम नहीं होती थीं। अब स्थिति बदल गई है; अब दाम पूरी तरह से बाजार की मांग, सेब की क्वालिटी और सेलर-बायर की मोलभाव करने की क्षमता पर निर्भर करेंगे। खासकर छोटे किसान, जिनके पास बड़े मार्केट तक माल ले जाने के संसाधन कम हैं, उन्हें अब भाव गिरने का ज्यादा डर सता रहा है।

फूड एंड बेवरेज कंपनियों पर असर

सेब पर आधारित उत्पाद बनाने वाली कंपनियों और जैम निर्माताओं के लिए कच्चे माल की लागत में अस्थिरता आ सकती है। प्राइवेट मार्केट में ट्रांजेक्शन तो तेज हो सकते हैं, लेकिन यहां NAFED जैसी ग्रेडिंग और पारदर्शिता की कमी खल सकती है। बिना किसी सरकारी बेसलाइन प्राइस के, आने वाले हार्वेस्ट सीजन में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

आगे क्या होगा?

इंडस्ट्री के जानकारों की नजर अब स्थानीय मंडियों पर टिकी है कि कैसे प्राइवेट ट्रेडर्स बड़े वॉल्यूम को हैंडल करते हैं। अगर कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो स्थानीय प्रशासन पर कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने या सीधे ग्राहकों तक माल पहुंचाने (Direct-to-consumer) जैसी नई सुविधाएं देने का दबाव बढ़ सकता है, ताकि किसान बिचौलियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.