कश्मीर के सेब उत्पादक इस सीजन भारी संकट में हैं। सेबों में लगी 'स्कैब' बीमारी के कारण लगभग **60%** फसल की क्वालिटी गिर गई है, जिससे किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
कश्मीर का सेब उद्योग इस वक्त एक बड़े दौर से गुजर रहा है। साल 2026 की फसल में फैली फंगल बीमारी 'स्कैब' ने सेबों की क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। त्योहारों का सीजन होने के कारण बाजार में प्रीमियम सेबों की मांग तो बहुत है, लेकिन सप्लाई न हो पाने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।\n\n### क्वालिटी और मुनाफे पर असर\n\nबाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मंडियों में पहुंच रहे कुल सेबों में से 50% से 60% फल सेकेंडरी ग्रेड यानी कम क्वालिटी वाले हैं। यह स्थिति किसानों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। खेती, लेबर, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन जैसे खर्चे फिक्स हैं, लेकिन कम क्वालिटी वाले सेबों की कीमत प्रीमियम वैरायटी की तुलना में बहुत कम मिल रही है।\n\n### क्यों बिगड़े हालात?\n\nइस संकट की मुख्य वजह साल 2026 का खराब मौसम रहा है। लंबे समय तक बारिश और उमस भरे वातावरण के कारण स्कैब फंगस तेजी से बगीचों में फैली। किसानों के लिए परेशानी यह है कि बगीचों के रख-रखाव पर जो भारी-भरकम खर्च शुरुआत में ही हो चुका है, उसे कम नहीं किया जा सकता, जबकि फसल की वैल्यू उम्मीद से काफी कम हो गई है।\n\n### ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मार\n\nकॉर्पोरेट सेक्टर के विपरीत, कश्मीर का सेब उद्योग पूरी तरह से असंगठित है। यह हजारों स्वतंत्र बागवानों और छोटे किसानों पर निर्भर है। इस कारण, यह आर्थिक तंगी सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है, जो इन खेतों को भारत भर के शहरी बाजारों से जोड़ती है। फिलहाल, डीलर यह देख रहे हैं कि क्या कम क्वालिटी वाले सेबों की कीमतों में स्थिरता आएगी, या फिर खराब माल की अधिकता के कारण स्थानीय बाजारों में कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा।
