कश्मीर के कृषि वैज्ञानिकों ने चावल की दो नई किस्में, Shalimar-4 और Shalimar-5 विकसित की हैं। इनकी पैदावार **7.2 टन** प्रति हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत से **2.5 गुना** अधिक है।
कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति
Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology-Kashmir (SKUAST-K) के Mountain Research Centre for Field Crops ने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Shalimar-4 को मैदानी इलाकों के लिए और Shalimar-5 को ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है। इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत इनका 'राइस ब्लास्ट' जैसी फंगल बीमारियों से लड़ने में सक्षम होना है।
कमाई का नया जरिया
ये किस्में न केवल अनाज के मामले में जबरदस्त हैं, बल्कि इनका पुआल (straw) भी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 50:50 के रेश्यो में मिलने वाला यह पुआल सर्दियों में पशुओं के चारे के काम आएगा और सेब के एक्सपोर्ट में पैकेजिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलेगा।
चुनौतियों के बीच उम्मीद
आंकड़े बताते हैं कि 1996 से 2023 के बीच क्षेत्र में लगभग 34,000 हेक्टेयर कृषि भूमि कम हो गई है। ऐसे में प्रति एकड़ पैदावार बढ़ाने वाले ये बीज रूरल इकोनॉमी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि यह सरकारी रिसर्च है और इसका किसी लिस्टेड कंपनी पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन एग्रीकल्चर इनपुट और फर्टिलाइजर सेक्टर पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। किसानों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम भविष्य में ग्रामीण मांग (Rural Demand) को मजबूती दे सकती है।
