कर्नाटक सरकार ने **27** एग्रीटेक स्टार्टअप्स के साथ मिलकर खेती को हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। '100-डे डेवलपमेंट प्रोग्राम' के तहत अब फसलों को खेत से लेकर मंडी तक AI के जरिए ट्रैक किया जाएगा, ताकि बर्बादी को रोका जा सके और किसानों को रियल-टाइम सलाह मिल सके।
खेती से लेकर बाजार तक निगरानी
कर्नाटक सरकार ने अपने 100-दिवसीय डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत 'संपूर्ण ग्रैंड चैलेंज' के माध्यम से 27 चुनिंदा एग्रीटेक स्टार्टअप्स को चुना है। इनका मुख्य काम एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है जो फसल के बीज बोने से लेकर कटाई, प्रोसेसिंग और निर्यात तक पूरी सप्लाई चेन पर नज़र रख सके। इसका सीधा मकसद फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
कैसे मिलेगी किसानों को मदद?
यह केवल ट्रैकिंग तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने पहले ही कन्नड़ भाषा में एक AI आधारित प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो किसानों को वॉयस और वीडियो के जरिए मौसम और फसल से जुड़ी सलाह देता है। उत्तरी कर्नाटक में इसके अच्छे नतीजे दिखे हैं, जहां इस तकनीक ने बारिश की कमी की चेतावनी पहले ही दे दी थी। इसकी मदद से प्रशासन ने समय रहते रागी जैसे सूखा-प्रतिरोधी बीज किसानों में बंटवाए, जिससे फसल खराब होने का रिस्क कम हुआ।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
इस तकनीक की असली सफलता जमीनी स्तर पर इसकी अडॉप्शन (Adoption) पर निर्भर करेगी। सरकार अब 'कृषि मेला' जैसे बड़े मंचों पर इन स्टार्टअप्स को 'फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन' (FPO) और फूड प्रोसेसर्स के साथ जोड़ रही है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि ये पायलट प्रोजेक्ट्स कितनी तेजी से स्केल करते हैं और आने वाली तिमाहियों में यह सिस्टम कृषि उपज की बर्बादी में कितनी बड़ी कटौती लाने में सफल होता है।
