भारत के बीज कानून में बड़ा बदलाव: किसानों में रोष, एग्री दिग्गजों को खुशी? आपकी थाली के लिए बड़े दांव!

AGRICULTURE
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AuthorAkshat Lakshkar|Published at:
भारत के बीज कानून में बड़ा बदलाव: किसानों में रोष, एग्री दिग्गजों को खुशी? आपकी थाली के लिए बड़े दांव!
Overview

भारत 1966 के बीज अधिनियम को बदलने के लिए ड्राफ्ट सीड्स बिल, 2025 पेश करने जा रहा है। जहां सरकार का लक्ष्य गुणवत्ता वाले बीज सुनिश्चित करना, नकली बीज रोकना और किसानों की सुरक्षा करना है, वहीं आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक बड़े कृषि व्यवसायों और बीज कंपनियों के पक्ष में है, जो पारंपरिक खेती के तरीकों और सामुदायिक बीज रक्षकों को हाशिए पर धकेल सकता है। नया कानून पंजीकरण, परीक्षण और डिजिटल ट्रैकिंग पेश करता है, लेकिन कॉर्पोरेट पक्षपात और छोटे किसानों के लिए पहुंच को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है।

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भारतीय सरकार ने ड्राफ्ट सीड्स बिल, 2025 प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य पुराने सीड्स एक्ट 1966 को बदलकर बीज क्षेत्र के नियमों को आधुनिक बनाना है। प्रस्तावित कानून का लक्ष्य गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ाना, नकली बीजों को रोकना और किसानों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है। मुख्य प्रावधानों में सभी बीज किस्मों (पारंपरिक किसान किस्मों को छोड़कर) के लिए अनिवार्य पंजीकरण, अनुमोदन के लिए वैल्यू फॉर कल्टीवेशन एंड यूज (VCU) परीक्षण, और बीज डीलरों के लिए राज्य पंजीकरण प्राप्त करना आवश्यक है। प्रत्येक बीज कंटेनर पर एक क्यूआर कोड होगा जिसे केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से पता लगाने (traceability) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, और एक सेंट्रल एक्रिडिटेशन सिस्टम राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कंपनियों को राज्यों में राष्ट्रीय पहचान दिला सकता है। छोटी गलतियों पर 1 लाख रुपये से शुरू होने वाले जुर्माने होंगे, जबकि मिलावटी बीज बेचने जैसे बड़े उल्लंघनों पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल हो सकती है। यह विधेयक व्यक्तिगत किसानों के अपने खेत-बचाए बीजों को सहेजने और आदान-प्रदान करने के अधिकारों की भी पुष्टि करता है, बशर्ते उन्हें किसी ब्रांड नाम के तहत बेचा न जाए।

प्रभाव:
यह कानून भारतीय बीज बाजार को काफी हद तक बदल सकता है। इससे समेकन (consolidation) हो सकता है, जिससे बड़ी बीज निगमों को लाभ होगा जो कठोर परीक्षण और डिजिटल अनुपालन मानकों को पूरा कर सकती हैं। बेहतर पता लगाने की क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण से औपचारिक बीज क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे हाइब्रिड और उन्नत किस्मों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, आलोचक इस बात पर कड़ी चिंता व्यक्त करते हैं कि विधेयक कॉर्पोरेट हितों के पक्ष में है, और यह छोटे किसानों और सामुदायिक बीज रक्षकों पर महत्वपूर्ण डिजिटल और नौकरशाही बोझ डालेगा। इस बात का डर है कि मानकीकृत परीक्षण मानदंडों के कारण स्वदेशी, जलवायु-लचीली किस्मों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, विदेशी आनुवंशिक रूप से संशोधित या पेटेंटेड बीजों का विदेशी मूल्यांकनों के आधार पर भारत में प्रवेश पारिस्थितिक और स्वास्थ्य जोखिमों के लिए चिंताएं बढ़ा रहा है, और छोटे किसानों की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी सवाल उठा रहा है। खराब बीजों के कारण फसल खराब होने के लिए सुलभ मुआवजा तंत्र की कमी भी विवाद का एक प्रमुख बिंदु है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.