भारत का सीड एक्सपोर्ट फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में बढ़कर **₹3,023 करोड़** हो गया है, लेकिन सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाएं और 'रेड टेप' इसके आगे के रास्ते में रोड़ा बने हुए हैं।
एक्सपोर्ट में 30% का शानदार उछाल
भारतीय बीज उद्योग ने इस साल गजब का प्रदर्शन किया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में एक्सपोर्ट का आंकड़ा बढ़कर ₹3,023 करोड़ पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹2,323 करोड़ था। हालांकि, यह बढ़त 30% की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि भारत अभी अपनी $5 बिलियन की असली क्षमता का एक छोटा हिस्सा ही हासिल कर पाया है।
क्यों फंस रहा है मामला?
बीज एक जीवित बायोलॉजिकल प्रोडक्ट है, जिसे एक निश्चित समय के भीतर बोना जरूरी होता है। अगर शिपमेंट कस्टम्स में अटक जाए या कागजी कार्रवाई में देरी हो, तो बीजों की क्वालिटी और वैल्यू दोनों खत्म हो जाती हैं। यही वजह है कि ग्लोबल बायर्स अब भारत के बजाय थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे भरोसेमंद बाजारों का रुख कर रहे हैं।
इस संकट की मुख्य वजह है अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी। कृषि मंत्रालय, डीजीएफटी, नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी और नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज जैसे कई विभागों की अलग-अलग गाइडलाइंस एक्सपोर्टर्स के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।
रिफॉर्म की मांग
भारत का कुल कृषि निर्यात $52.55 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन सीड सेगमेंट में बाधाएं अभी भी बरकरार हैं। इंडस्ट्री अब सरकार से 'सिंगल-विंडो' डिजिटल क्लियरेंस सिस्टम की मांग कर रही है। अगर रिस्क-बेस्ड कंप्लायंस और सिंगल-विंडो अप्रूवल लागू हो जाता है, तो भारत ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है।
