रेगुलेटरी बदलाव की ओर भारत का कदम
यह नया 'सीड्स बिल, 2025' बजट सेशन (Budget Session) के आखिरी हिस्से में पेश किया जाएगा और यह 1966 के पुराने सीड्स एक्ट (Seeds Act) की जगह लेगा। इस नए कानून में सभी बीज की वैरायटी (Seed Varieties) का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। पुरानी व्यवस्था में रिसर्च हाइब्रिड (Research Hybrids) और नॉन-नोटिफाइड वैरायटी (Non-Notified Varieties) जैसी महत्वपूर्ण कैटेगरी शामिल नहीं थीं। अब, नकली या अनरजिस्टर्ड बीज बेचने जैसे बड़े अपराधों के लिए ₹30 लाख तक का जुर्माना और 3 साल तक की सजा हो सकती है। छोटे-मोटे अपराधों के लिए भी ₹1 लाख से जुर्माना शुरू होगा।
मार्केट पर क्या होगा असर?
भारत का करीब ₹40,000 करोड़ का बीज (Seed) मार्केट एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और सख्त पेनल्टी से कंपनियों पर ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) और कंप्लायंस (Compliance) का बोझ बढ़ेगा। माना जा रहा है कि इससे बड़ी कंपनियों को फायदा हो सकता है, जो पहले से ही पब्लिक सेक्टर (Public Sector) पर भारी पड़ रही प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) की हिस्सेदारी को और बढ़ा सकता है। पिछले कुछ सालों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 64% से ज्यादा हो गई है।
क्वालिटी और पहचान पर जोर
नए कानून में बीज की पहचान (Traceability) के लिए QR कोड (QR Codes) को अनिवार्य किया गया है। इसका मकसद किसानों को घटिया बीज मिलने की समस्या से निजात दिलाना है, जिससे उन्हें भारी नुकसान होता है। हालांकि, इस बिल में किसानों के बीज बचाने और एक्सचेंज करने के पारंपरिक अधिकारों को भी सुरक्षित रखा गया है।
संभावित चुनौतियां
हालांकि, इस बिल का मकसद सेक्टर को प्रोफेशनल बनाना है, लेकिन बढ़ी हुई रेगुलेटरी डिमांड्स (Regulatory Demands) से छोटे बीज उत्पादकों और नए खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) का अनुमान है कि रेगुलेटरी दिक्कतें, जैसे कि राज्य-स्तरीय टेस्टिंग और लाइसेंस में देरी, इंडस्ट्री को हर साल ₹800 करोड़ से ज्यादा का नुकसान पहुंचाती हैं। सख्त पेनल्टी से आरएंडडी (R&D) में रिस्क (Risk) लेने की प्रवृत्ति कम हो सकती है, जिससे नई वैरायटी आने में देरी हो सकती है।
भविष्य की राह
अगर इस नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) को ठीक से लागू किया गया, तो भारत के बीज सेक्टर में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद है। प्रोपोनेंट्स (Proponents) का मानना है कि 'वन नेशन, वन लाइसेंस' (One Nation, One License) जैसी व्यवस्था से कंपनियां तेजी से नई वैरायटी ला सकेंगी और R&D में इन्वेस्टमेंट 13-15% तक बढ़ सकता है। भारत का लक्ष्य 2035 तक बीज मार्केट में अपनी ग्लोबल हिस्सेदारी को वर्तमान 1% से बढ़ाकर 10% करना है। बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) और प्रिसिजन एग्रीकल्चर (Precision Agriculture) में हो रही तरक्की के साथ, यह मार्केट करीब $4.8 बिलियन का है और इसमें और भी बड़ी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।