अक्टूबर के महीने में हुई कम बारिश ने रबी सीजन की बुवाई पर संकट खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों में नमी की कमी के कारण 2026-27 की फसल पर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर फूड इन्फ्लेशन और ग्रामीण कंजम्पशन पर पड़ सकता है।
रबी सीजन की शुरुआत काफी अनिश्चितता के साथ हुई है। 1 अक्टूबर से 18 अक्टूबर, 2026 के बीच के आंकड़े चिंताजनक हैं। मध्य प्रदेश में बारिश की 96% और राजस्थान में 55% कमी दर्ज की गई है। इस नमी की कमी ने सरसों, चना और गेहूं की बुवाई को देरी से डाल दिया है, जिससे 177.72 मिलियन टन के राष्ट्रीय उत्पादन लक्ष्य को पूरा करना चुनौती बन गया है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था भारत की खपत (Consumption) का मुख्य इंजन है। जब फसल खराब होती है या नमी की कमी होती है, तो किसानों की आय प्रभावित होती है। इसका सीधा असर FMCG और एग्रीकल्चर इनपुट कंपनियों जैसे फर्टिलाइजर, बीज और ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर्स के रेवेन्यू पर पड़ सकता है।
महंगाई और RBI का रुख
गेहूं और दालें जरूरी कमोडिटी हैं। यदि सप्लाई कम रहती है, तो खाने-पीने की चीजों में महंगाई बढ़ सकती है। RBI (Reserve Bank of India) के लिए फूड इन्फ्लेशन एक बड़ा पैमाना है, जो भविष्य में ब्याज दरों पर भी असर डाल सकता है।
अल नीनो (El Niño) का साया
दिसंबर में पीक पर पहुंचने वाला 'अल नीनो' मौसम के मिजाज को बिगाड़ रहा है। इसके कारण 'वेस्टर्न डिस्टरबेंस' भी प्रभावित हो रहे हैं। महाराष्ट्र के 85% तालुका पहले से ही सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं। आने वाले हफ्तों में निवेशकों को बुवाई के सरकारी डेटा और एग्री-इनपुट कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी होगी ताकि यह समझ सकें कि जमीन पर डिमांड का ट्रेंड कैसा है।
