भारत अब 'न्यूट्रिएंट-डेंस' खेती की ओर कदम बढ़ा रहा है। सरकार बायोफोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा दे रही है, जिससे एग्री-सेक्टर में यील्ड (Yield) के अलावा न्यूट्रिशन वैल्यू पर फोकस शिफ्ट हो रहा है।
भारत की कृषि नीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब तक हमारा फोकस सिर्फ पैदावार बढ़ाने पर था, लेकिन अब इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने बायोफोर्टिफाइड फसलों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। ये ऐसी फसलें हैं जिनमें आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स की मात्रा प्राकृतिक रूप से ज्यादा होती है, जो देश में 'हिडन हंगर' (Hidden Hunger) की समस्या से निपटने में मदद करेंगी।
Seed और Food कंपनियों पर असर
निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य में एग्री-सेक्टर में वैल्यू क्रिएशन का आधार बदल सकता है। अभी तक कंपनियों की सफलता सिर्फ 'यील्ड पर एकड़' से मापी जाती थी, लेकिन अब 'न्यूट्रिशनल प्रोफाइल' भी एक अहम फैक्टर होगा। जो सीड कंपनियां इन बायोफोर्टिफाइड ट्रेड्स को अपने पोर्टफोलियो में जल्दी शामिल करेंगी, उनके लिए लंबी अवधि के अवसर बन सकते हैं।
वहीं, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा गेम-चेंजर हो सकता है। फिलहाल कंपनियां प्रोसेसिंग के बाद आर्टिफिशियल तरीके से न्यूट्रिशन जोड़ती हैं, लेकिन अगर उन्हें खेत से ही न्यूट्रिएंट-रिच सामग्री मिलने लगे, तो वे अपने सप्लाय चेन को बेहतर बना सकती हैं और ब्रांड वैल्यू भी बढ़ा सकती हैं।
चुनौतियां और रिस्क (Sector Risks)
इन्वेस्टर्स को यह भी ध्यान रखना होगा कि यह बदलाव अभी शुरुआती चरण में है। इसकी सफलता मुख्य रूप से किसानों पर निर्भर करेगी। किसान आमतौर पर उन्हीं बीजों को चुनते हैं जिनसे बंपर पैदावार और अच्छी मार्केट वैल्यू मिले। अगर ये बायोफोर्टिफाइड बीज पैदावार के मामले में पारंपरिक बीजों को टक्कर नहीं दे पाए, तो किसानों का इन्हें अपनाना मुश्किल होगा। इसके अलावा, सप्लाई चेन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जटिलताएं भी इस सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती हैं।
