गन्ने के नियमों में बड़ा फेरबदल
1966 के पुराने गन्ने (नियंत्रण) आदेश को बदलकर अब 2026 का मसौदा पेश किया गया है, जो देश को एक एथेनॉल-संचालित बायो-इकोनॉमी (Bio-economy) की ओर ले जाने का इशारा करता है। चीनी मिलें अब सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा और बायोफ्यूल (Biofuel) रणनीति का अहम हिस्सा बनेंगी। एक बड़ा बदलाव यह है कि 600 लीटर एथेनॉल को 1 टन चीनी के बराबर माना जाएगा, जिसका असर प्रोडक्शन कोटे (Production Quotas) और आउटपुट की गणना पर पड़ेगा।
खांडसारी चीनी को मिला औपचारिक दर्जा
इस नए ड्राफ्ट में खांडसारी चीनी को भी फेयर एंड रिमुनरेटिव प्राइस (FRP) के दायरे में लाया गया है। यह कदम एक ऐसे सेक्टर में पारदर्शिता लाने का लक्ष्य रखता है जो अब तक काफी हद तक अनौपचारिक था। इसके अलावा, खोई (Bagasse), शीरा (Molasses) और प्रेस मड (Press Mud) जैसे बाय-प्रोडक्ट्स (By-products) के वैल्यूएशन को भी शामिल किया गया है।
चीनी मिलों पर क्या होगा असर?
यह नया आदेश चीनी मिलों की इकोनॉमिक्स (Economics) को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। एथेनॉल को प्रोडक्शन कोटे और प्राइसिंग में शामिल करने से कंपनियों पर बायोफ्यूल उत्पादन बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। यह भारत के ऊर्जा स्वतंत्रता और कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात को कम करने के लक्ष्यों के अनुरूप है। Balrampur Chini Mills (मार्केट कैप: ₹10,353 करोड़, P/E: 25.06), Triveni Engineering & Industries (मार्केट कैप: ₹8,648.70 करोड़, P/E: 28.63), और Dhampur Sugar Mills (मार्केट कैप: ₹918.40 करोड़, P/E: 13.56) जैसी कंपनियों को एथेनॉल आउटपुट को ऑप्टिमाइज़ (Optimize) करने पर अधिक ध्यान देना होगा। भारत पहले ही E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) लक्ष्य हासिल कर चुका है और E85 की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में एथेनॉल की मांग में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसके लिए कैपेसिटी एक्सपैंशन (Capacity Expansions) की जरूरत पड़ सकती है।
किसानों और नई फैक्ट्रियों के नियम
FRP सिस्टम में खांडसारी चीनी को लाने से पारंपरिक चीनी उत्पादन के एक बड़े हिस्से को फॉर्मलाइज (Formalize) करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस क्षेत्र के लिए आधिकारिक डेटा की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। ड्राफ्ट में खांडसारी यूनिट्स के लिए लाइसेंसिंग (Licensing) और इंस्पेक्शन (Inspections) को अनिवार्य किया गया है। नए नियमों के तहत, नई चीनी फैक्ट्रियों के लिए न्यूनतम दूरी 15 किमी से बढ़ाकर 25 किमी करने का प्रस्ताव है, ताकि अधिक वितरित विकास को बढ़ावा मिल सके। किसानों को गन्ना डिलीवरी के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा, और देरी होने पर 15% सालाना ब्याज का प्रावधान है।
संभावित जोखिम और भविष्य की राह
एथेनॉल पर सरकार का यह जोर कुछ जोखिम भी पैदा करता है। E85 पेट्रोल को अपनाने में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की चुनौतियां हैं और मौजूदा इंजन इतने हाई ब्लेंड (High Blend) के लिए तैयार नहीं हो सकते। एथेनॉल पर ध्यान केंद्रित करने से पारंपरिक चीनी उत्पादन से पूंजी डायवर्ट (Divert) हो सकती है, जिससे चीनी बिक्री पर अधिक निर्भर कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। मौसम का पूर्वानुमान भी एक बड़ा कारक है; 2026 में सामान्य से कम मॉनसून (Monsoon) होने की स्थिति में गन्ने की उपलब्धता घट सकती है। नीतिगत बदलावों और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न से जुड़ी अनिश्चितताएं प्रमुख कारक हैं जिन पर नजर रखनी होगी।
