India Milk Production: मांग बढ़ी, उत्पादन घटा! किसानों की बढ़ी टेंशन, कीमतें आसमान पर

AGRICULTURE
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AuthorAditya Rao|Published at:
India Milk Production: मांग बढ़ी, उत्पादन घटा! किसानों की बढ़ी टेंशन, कीमतें आसमान पर
Overview

भारत में दूध की मांग और उत्पादन के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। चारे की भारी कमी और पशु आहार की लागत में **35-40%** की बढ़ोतरी के चलते डेयरी किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नतीजतन, खेत स्तर पर दूध की कीमतें पिछले पांच सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

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मांग के मुकाबले उत्पादन में सुस्ती, कीमतें ₹2-₹5 तक बढ़ीं

दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक भारत में दूध की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा है। देश भर में दूध के दाम ₹2 से ₹5 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इसकी मुख्य वजह चारे की भारी किल्लत और पशु आहार की लागत में आई 35-40% की भारी बढ़ोतरी है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कतों से पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भी 70% तक का इजाफा हुआ है।

पिछले पांच सालों में दूध उत्पादन की रफ्तार घटकर सालाना करीब 3.5% से 3.78% रह गई है, जबकि उपभोक्ताओं की मांग 6% सालाना की दर से बढ़ रही है। इस बड़े अंतर की वजह से बाजार में हमेशा कमी बनी रहती है। यह कोई मामूली उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या बन गई है।

उत्पादन और क्वालिटी पर असर डालने वाली गहरी समस्याएं

डेयरी सेक्टर की समस्याएं सिर्फ लागत तक ही सीमित नहीं हैं। लो-क्वालिटी फीड का इस्तेमाल, देश की पशु आहार उत्पादन क्षमता का अनुमानित 120 मिलियन मीट्रिक टन की जरूरत से बहुत कम होना, और बीमारियों का प्रकोप भी उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर रहा है। लम्पी स्किन डिजीज (LSD) जैसी बीमारियों से 2022-23 में करीब 2.44 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जिससे दूध की पैदावार घटी और जानवरों की मौतें बढ़ीं।

भारतीय डेयरी उत्पादों की क्वालिटी भी एक बड़ी चुनौती है, जो निर्यात को सीमित करती है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लेबलिंग और डॉक्यूमेंटेशन की गलतियों के कारण 57% से अधिक निर्यात रिजेक्ट हो जाते हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने भारत के डेयरी प्लांट्स को सख्त मानकों पर खरा न उतरने के कारण मंजूरी नहीं दी है।

युवा किसानों की कमी और ढांचागत खामियां

बढ़ती लागत (जो ग्लोबल औसत से 10-15% अधिक है) और लगातार बनी हुई चुनौतियों के कारण युवा पीढ़ी डेयरी फार्मिंग से दूर जा रही है। इससे कुशल श्रमिकों की कमी और इनोवेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि, हेरिटेज फूड्स (Market Cap ~₹2,727 Cr), पारस मिल्क फूड्स (Market Cap ~₹2,248 Cr), और हाटसन एग्रो प्रोडक्ट (Market Cap ~₹20,493 Cr) जैसी कंपनियां इस मुश्किल माहौल में काम कर रही हैं, लेकिन ये ढांचागत समस्याओं को दूर करने के लिए काफी नहीं हैं।

सरकार की पहल और भविष्य की उम्मीदें

इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने नई फडर पॉलिसी (Fodder Policy) पर जोर दिया है, जिसका मकसद पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कर लागत 15% तक कम करना है। सरकार क्वालिटी फडर बीज उत्पादन और फीड इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी मदद कर रही है। उम्मीद है कि इन नीतियों के सफल कार्यान्वयन से भारतीय डेयरी बाजार 2026-2034 तक बढ़कर INR 58,034.06 बिलियन तक पहुंच जाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.