वित्त वर्ष 2026 (FY26) में भारत में फर्टिलाइजर, खासकर यूरिया (Urea) का उत्पादन (production) घट गया है। यह हालिया ग्रोथ के उलट है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया (West Asia) में भू-राजनीतिक अस्थिरता (geopolitical instability) के चलते प्राकृतिक गैस (natural gas) की कम उपलब्धता है, जो कि एक ज़रूरी कच्चा माल है। नतीजतन, फर्टिलाइजर आयात (import) पर भारत की निर्भरता FY25 के करीब 23% से बढ़कर FY26 में अनुमानित 34% हो गई है। यूरिया का आयात लगभग दोगुना हो गया है, और डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) के आयात में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। ग्लोबल फर्टिलाइजर की कीमतें भी इस सप्लाई प्रेशर को दर्शा रही हैं, DAP की कीमतें साल-दर-साल लगभग दोगुनी हो गई हैं, और यूरिया की कीमतों में भी तेज़ी आई है।
आयात की ऊंची लागत (import costs) और किसानों को राहत देने के लिए सरकार की सब्सिडी (subsidy) की कोशिशें, खासकर खरीफ सीज़न के लिए, एक बड़ी फिस्कल चुनौती पेश कर रही हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी की ज़रूरत चालू बजट ₹1.71 लाख करोड़ से कहीं ज़्यादा होगी। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, यह बिल ₹70,000 करोड़ तक बढ़ सकता है और FY27 में ₹2.41 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। यह FY26 के संशोधित अनुमान ₹1.86 ट्रिलियन से काफी ज़्यादा है। भारत में फर्टिलाइजर सब्सिडी की लागत ऐतिहासिक रूप से बड़ी रही है, जो 1980/1981 में ₹505 करोड़ से बढ़कर 2022/2023 में ₹2,25,220 करोड़ हो गई थी, जो सरकारी खर्च का एक बड़ा हिस्सा है।
भारतीय फर्टिलाइजर सेक्टर का ढांचा (structure) इसे बेहद कमजोर बनाता है, खासकर यूरिया उत्पादन के लिए आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर इसकी भारी निर्भरता। LNG देश के कुल गैस उपयोग का एक बड़ा हिस्सा है, और इसकी कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण अत्यधिक अस्थिर (volatile) रहती हैं, जो सीधे उत्पादन लागत को प्रभावित करती हैं। फर्टिलाइजर और ऊर्जा व्यापार के बड़े वॉल्यूम को संभालने वाले प्रमुख शिपिंग रूट्स, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), भी एक जोखिम पेश करते हैं। 33 यूनिट्स में घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता में वृद्धि के बावजूद, यह मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे आयात के लिए मज़बूरी बढ़ जाती है। यह निर्भरता सेक्टर को ग्लोबल कीमतों के उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। भारत अपने फर्टिलाइजर और कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें FY24 में DAP की 67% मांग और कुल फर्टिलाइजर आयात का 41% यूरिया शामिल है।
वित्तीय दबाव के बावजूद, सरकार सप्लाई गैप को भरने के लिए विभिन्न आयात स्रोतों का उपयोग करके किसानों के लिए फर्टिलाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सरकार अतिरिक्त सब्सिडी फंड प्रदान करना जारी रखेगी, जैसा कि हाल के वर्षों में ऊंची ग्लोबल कीमतों के दौरान हुआ है। हालांकि, बढ़ती सब्सिडी लागत फिस्कल मैनेजमेंट पर सवाल उठाती है और खाद्य कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की ओर इशारा करती है। मौजूदा FY27 बजट आवंटन ₹1.71 लाख करोड़ को व्यापक रूप से अपर्याप्त माना जा रहा है, जो अस्थिर ग्लोबल मार्केट में फार्म सपोर्ट और मज़बूत फाइनेंस के बीच संतुलन बनाने के कठिन कार्य को उजागर करता है।