Fertilizer Import: खाद की भारी किल्लत और निर्भरता! भारत की फूड सिक्योरिटी के लिए बढ़ा खतरा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Fertilizer Import: खाद की भारी किल्लत और निर्भरता! भारत की फूड सिक्योरिटी के लिए बढ़ा खतरा

भारत अपनी जरूरत का **68.6%** फर्टिलाइजर आयात करता है, जो घरेलू खेती के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल रिस्क है। दालों का रकबा घटने और आयात **7.34 मिलियन टन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से एग्रीकल्चर सेक्टर पर भारी दबाव बढ़ गया है।

भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर के सामने इस वक्त एक बड़ा स्ट्रक्चरल चैलेंज खड़ा है। देश अपनी कुल खाद जरूरतों का 68.6% हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदता है। इस भारी निर्भरता का मतलब है कि Coromandel International, Chambal Fertilisers, RCF, और GNFC जैसी दिग्गज कंपनियां ग्लोबल मार्केट में होने वाली हलचल और प्राइस शॉक से सीधे प्रभावित होती हैं।

खाद से लेकर दालों तक का संकट

यूरिया के लिए देश नेचुरल गैस के आयात पर टिका है, वहीं पोटाश का भंडार हमारे पास बिल्कुल नहीं है। इसके अलावा, रॉक फॉस्फेट की 90% से ज्यादा मांग आयात के जरिए पूरी होती है। जब भी ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होती है या शिपिंग कॉस्ट बढ़ती है, तो इन कंपनियों के मार्जिन पर बुरा असर पड़ता है। सरकार द्वारा मिलने वाली सब्सिडी ही इन्हें फिलहाल सहारा दे रही है।

इधर दालों की स्थिति भी चिंताजनक है। 2021-22 में दालों के तहत आने वाला रकबा 30.6 मिलियन हेक्टेयर था, जो घटकर 26.9 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। नतीजतन, 2024-25 के दौरान दालों का इंपोर्ट रिकॉर्ड 7.34 मिलियन टन पहुंच गया। यह स्थिति न केवल फूड इन्फ्लेशन बढ़ा रही है, बल्कि फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की लागत भी बढ़ा रही है।

पानी और पोषण की चुनौती

खेती केवल खाद तक सीमित नहीं है, पानी का संकट भी बड़ा रिस्क है। भारत में इरिगेशन का 60% दारोमदार ग्राउंडवाटर पर है, जबकि प्रति व्यक्ति फ्रेश वॉटर का स्तर गिरकर 1,014 क्यूबिक मीटर रह गया है। यह 1,700 क्यूबिक मीटर के वाटर स्ट्रेस बेंचमार्क से काफी नीचे है, जो भविष्य में फसल पैदावार को अस्थिर बना सकता है। साथ ही, देश की 35.5% आबादी यानी करीब 520.1 मिलियन लोग अभी भी प्रोटीन युक्त डाइट पाने में संघर्ष कर रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.