एडिबल ऑयल आयात में 3% का उछाल, पर वजह चिंताजनक!
भारत ने फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 में 166.51 लाख टन एडिबल ऑयल का आयात करके पिछले साल के मुकाबले 3% का उछाल देखा है। लेकिन, यह बढ़ती हुई संख्या देश की घरेलू ताकत का नहीं, बल्कि व्यापारिक खामियों का नतीजा है। इस भारी आयात के पीछे ग्लोबल कीमतों में इजाफा और देश की अपनी तिलहन की खेती की दिक्कतें छिपी हुई हैं।
नेपाल का ड्यूटी-फ्री गेम
नेपाल से भारत को होने वाले ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट में 113% की भारी बढ़ोतरी हुई, जो 7.36 लाख टन तक पहुंच गया। साफ्टा (SAFTA) समझौते के तहत, रिफाइंड सोयाबीन तेल बिना किसी इंपोर्ट ड्यूटी के भारत में आ रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों को शक है कि यह मात्रा नेपाल की अपनी उत्पादन क्षमता से कहीं ज़्यादा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि दूसरे देशों का माल, इंपोर्ट ड्यूटी से बचने के लिए नेपाल के रास्ते भारत भेजा जा रहा है। इस प्रैक्टिस से सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है और भारतीय रिफाइनर्स व किसानों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है।
घरेलू खेती की लाचारी और बढ़ती लागत
भारत अपनी एडिबल ऑयल की ज़रूरत का करीब 56-60% हिस्सा आज भी इंपोर्ट करता है। इसकी वजह है देश में तिलहन की खेती की कमज़ोरी। कम पैदावार, छोटे खेत और सिंचाई की कमी जैसी दिक्कतें घरेलू उत्पादन को रोक रही हैं। साथ ही, सरकारी नीतियां भी अक्सर अनाज वाली फसलों को तिलहन से ज़्यादा अहमियत देती हैं। इन घरेलू परेशानियों के ऊपर, अप्रैल 2026 तक ग्लोबल एडिबल ऑयल की कीमतें चार साल के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इसके अलावा, भारतीय रुपए का कमजोर होना भी इंपोर्ट की लागत को बढ़ा रहा है, जिससे देश के $333 बिलियन के रिकॉर्ड मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट पर और दबाव बन रहा है।
नीतिगत चुनौतियां और 'नेपाल कनेक्शन'
नेपाल से ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट पर यह निर्भरता भारत के लिए एक बड़ी नीतिगत दुविधा पैदा कर रही है। इससे देश का आत्मनिर्भरता हासिल करने और घरेलू कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने का लक्ष्य कहीं न कहीं कमजोर पड़ रहा है। ट्रेड एसोसिएशनों ने सरकार को इस बारे में आगाह किया है कि नेपाल के एक्सपोर्ट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी शायद उसकी अपनी उत्पादन क्षमता के हिसाब से सही नहीं है। इस स्थिति से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि लोकल प्रोसेसर और किसानों पर भी अनुचित प्रतिस्पर्धा का दबाव बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से एडिबल ऑयल की खपत कम करने को कहा था, यह दिखाती है कि सरकार भी इंपोर्ट के बोझ और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंतित है।
इंडस्ट्री का नज़रिया और आगे की राह
भारत के एडिबल ऑयल सेक्टर के बड़े खिलाड़ी जैसे Adani Wilmar, Patanjali Foods, और Emami Agrotech इस मुश्किल बाज़ार में अपनी राह बना रहे हैं। भले ही सरकार एडिबल ऑयल मिशन जैसे कदम उठा रही है, लेकिन पैदावार, सिंचाई और नीतिगत समर्थन में लगातार सुधार की ज़रूरत है। जब तक घरेलू उत्पादन क्षमता में बड़े सुधार नहीं होते और ट्रेड नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता, तब तक भारत ग्लोबल कीमतों के झटके और ट्रेड एग्रीमेंट्स के दुरुपयोग के प्रति संवेदनशील रहेगा।