बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड और मिट्टी की खराब सेहत के चलते भारत की मुख्य फसलों में न्यूट्रिएंट्स की कमी देखी जा रही है। अब कृषि क्षेत्र का पूरा ध्यान 'वॉल्यूम' से हटकर 'बायोफोर्टिफाइड सीड्स' और 'रिजेनरेटिव फार्मिंग' की तरफ शिफ्ट हो रहा है, जो निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।
भारत का कृषि परिदृश्य एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। गेहूं, चावल और दालों जैसी मुख्य फसलों में न्यूट्रिएंट्स का स्तर लगातार गिर रहा है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि वायुमंडल में बढ़ रहा कार्बन डाइऑक्साइड और मिट्टी का लगातार क्षरण फसलों से आयरन और जिंक जैसे जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को कम कर रहा है। अब तक भारत का पूरा जोर फूड सिक्योरिटी के लिए पैदावार यानी वॉल्यूम बढ़ाने पर रहा है, लेकिन अब नई परिस्थितियों में क्वालिटी पर ध्यान देना अनिवार्य हो गया है।
वॉल्यूम से वैल्यू की ओर
सालों तक भारत में सफलता का पैमाना प्रति एकड़ पैदावार रही है। लेकिन इस होड़ में मिट्टी की जैव-विविधता (Soil Biodiversity) पर गहरा असर पड़ा है। नाइट्रोजन-आधारित फर्टिलाइजर्स के ज्यादा इस्तेमाल से फसल तो बड़ी दिखती है, लेकिन उसमें खनिजों का घनत्व (Mineral Density) कम हो गया है। अब इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) और निजी कंपनियां मिलकर ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही हैं जहां केवल पैदावार नहीं, बल्कि पोषक तत्वों की मात्रा को भी रिवॉर्ड मिले।
सीड इंडस्ट्री में उभरते अवसर
बायोफोर्टिफिकेशन—यानी आधुनिक तकनीक से बीजों की न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ाना—एक बड़ा समाधान बनकर उभर रहा है। सीड कंपनियों के लिए यह R&D के नजरिए से गेम-चेंजर है। जो कंपनियां जेनेटिक्स में इनोवेशन कर ऐसी वैराइटीज बाजार में उतारेंगी, वे मार्केट का एक बड़ा हिस्सा हथिया सकती हैं। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो इन हाई-न्यूट्रिशन बीजों को बड़े पैमाने पर कमर्शियलाइज करने में सक्षम हैं।
फर्टिलाइजर सेक्टर पर असर
सिर्फ बीज ही नहीं, फर्टिलाइजर सेक्टर भी बदल रहा है। अब पारंपरिक खाद की जगह मिट्टी की सेहत सुधारने वाले ऑर्गनिक सोल कंडीशनर्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट-एनरिच्ड फर्टिलाइजर्स की मांग बढ़ रही है। जो इनपुट कंपनियां अपना पोर्टफोलियो बदलेंगी, उनके लिए भविष्य में ज्यादा संभावनाएं होंगी।
एफएमसीजी और इकोनॉमी पर प्रभाव
हेल्थ के प्रति जागरूक होते ग्राहकों के बीच एफएमसीजी (FMCG) कंपनियां अब बेहतर और पौष्टिक कच्चे माल की तलाश में हैं। यह बदलाव सप्लाई चेन में एक नई मांग पैदा करेगा। आने वाले समय में सरकारी नीतियां, बायोफोर्टिफाइड सीड्स को अपनाने की रफ्तार और सस्टेनेबल फार्मिंग सॉल्यूशंस देने वाली कंपनियों का परफॉर्मेंस निवेशकों के लिए मुख्य फोकस रहेगा।
