Coir Exports: भारत का जलवा, फाइनेंशियल ईयर 2026 में कोयर एक्सपोर्ट पहुंचा ₹6,614 करोड़ के पार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Coir Exports: भारत का जलवा, फाइनेंशियल ईयर 2026 में कोयर एक्सपोर्ट पहुंचा ₹6,614 करोड़ के पार

भारत के कोयर एक्सपोर्ट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹6,614.40 करोड़** का आंकड़ा छू लिया है। कोयर पिथ और टफ्टेड मैट्स की ग्लोबल डिमांड से सेक्टर को बूस्ट मिला है, लेकिन सेक्टर की फ्रैगमेंटेड प्रकृति और कर्ज पर निर्भरता निवेशकों के लिए एक रिस्क फैक्टर भी है।

भारत ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹6,614.40 करोड़ का कोयर एक्सपोर्ट कर ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाई है। आज भारत दुनिया के कुल कोयर प्रोडक्शन का करीब दो-तिहाई (2/3) हिस्सा सप्लाई करता है, जो देश की रूरल इकोनॉमी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। कोयर पिथ, धागे और टफ्टेड मैट्स जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की डिमांड ने इस एक्सपोर्ट ग्रोथ में मुख्य भूमिका निभाई है।

सेक्टर का स्ट्रक्चर और फाइनेंशियल हकीकत

निवेशकों को यह समझना होगा कि यह सेक्टर बड़े कॉर्पोरेट्स की तरह नहीं, बल्कि मुख्य रूप से MSMEs द्वारा संचालित है। सरकारी 'उद्यम' (Udyam) पोर्टल पर इस सेक्टर की 21,000 से ज्यादा इकाइयां रजिस्टर्ड हैं। हालांकि इसका सीधा स्टॉक मार्केट कनेक्शन नहीं है, लेकिन यह रूरल मैन्युफैक्चरिंग की सेहत का बड़ा पैमाना है। सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा अपनी ऑपरेशंस के लिए कर्ज पर निर्भर है, जिससे ये कंपनियां ब्याज दरों में बदलाव को लेकर काफी सेंसिटिव हो जाती हैं।

ग्लोबल डिमांड और रिस्क फैक्टर्स

भारतीय कोयर उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और यूके जैसे देशों में है। इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स की तरफ दुनिया का झुकाव कोयर के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल ने भी एक्सपोर्टर्स को कुछ हद तक सहारा दिया है।

हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। कच्चे माल (Raw material) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चुनिंदा देशों पर एक्सपोर्ट की निर्भरता भविष्य के लिए रिस्क पैदा कर सकती है। यदि इन प्रमुख बाजारों में आर्थिक सुस्ती आती है, तो छोटे एक्सपोर्टर्स पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

आगे क्या देखें?

टेक्सटाइल और एग्री-कमोडिटी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए कोयर एक्सपोर्ट के आंकड़े कंज्यूमर डिमांड का एक अहम संकेत हैं। भविष्य में इस सेक्टर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कैसे ये छोटी कंपनियां अपने कर्ज को मैनेज करती हैं और तकनीक (Technology) को अपनाकर अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कितना बेहतर बना पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.