सरकार के नए 'Bharat-VISTAAR' AI प्लेटफॉर्म से भारतीय कृषि में बड़े बदलाव की उम्मीद है। साल 2034 तक कृषि में AI मार्केट **$415.5 मिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन छोटे किसानों की जमीनों का बंटवारा और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी जैसे बड़े रिस्क अभी भी बरकरार हैं।
भारत में खेती अब केवल मिट्टी और पानी तक सीमित नहीं रही है, बल्कि टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर एक बड़ा 'AI बदलाव' देख रही है। 'Bharat-VISTAAR' नाम का यह मल्टीलिंगुअल AI टूल 2026-27 के यूनियन बजट की बड़ी पेशकश है। इसे सरकारी AgriStack और Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के डेटा के साथ जोड़कर तैयार किया गया है, ताकि किसानों को उनके खेत और फसल के हिसाब से रियल-टाइम सलाह मिल सके।
मार्केट की ग्रोथ और गणित
आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2025 में भारत का AI-इन-एग्रीकल्चर मार्केट $84.8 मिलियन का था, जो 2034 तक बढ़कर $415.5 मिलियन होने की उम्मीद है। इसकी सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) करीब 18.73% रहने का अनुमान है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अब तक 23.5 करोड़ से ज्यादा फसल भूखंडों (crop plots) का सर्वे हो चुका है और 7.63 करोड़ से ज्यादा 'किसान आईडी' रजिस्टर्ड की गई हैं। यह डेटा आने वाले समय में खाद और पानी के सही इस्तेमाल में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
मौसम और कीटों से सुरक्षा
AI का असली फायदा 'प्रोएक्टिव फार्मिंग' में है। नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम 66 फसलों में 432 तरह के कीटों पर नजर रख रहा है। इससे फसल बर्बाद होने से पहले ही अलर्ट मिल जाता है। निवेशकों के लिए, यह सेक्टर ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेंसर-आधारित इक्विपमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक बड़े मौके की तरह है।
क्या हैं असल चुनौतियां?
इतनी भारी-भरकम ग्रोथ के बावजूद, कुछ जमीनी हकीकतें ध्यान में रखनी जरूरी हैं। भारत के 85% से ज्यादा किसान छोटे जोत वाले हैं, जिनके लिए महंगी टेक्नोलॉजी बिना सब्सिडी के खरीदना लगभग नामुमकिन है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट की कमी और साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) का खतरा भी चिंता का विषय है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या केवल सॉफ्टवेयर के दम पर मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं को खत्म किया जा सकता है, या यह डिजिटल इंडिया का एक लंबा सफर है?
