खेती में क्रांति का बिगुल
भारत का कृषि क्षेत्र रिकॉर्ड उत्पादन तो कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही बड़े पैमाने पर कुपोषण और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर से जूझ रहा है। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ता तापमान और संसाधनों पर दबाव भारतीय खाद्य प्रणालियों को बदल रहा है। ऐसे में, यह साफ है कि खेती को अब जलवायु-तनाव वाले क्षेत्र से बदलकर जलवायु समाधान का एक बड़ा जरिया बनना होगा। इसी बड़ी जरूरत ने Agri-Tech यानी कृषि-प्रौद्योगिकी में भारी निवेश को जगाया है।
मार्केट में बंपर ग्रोथ का अनुमान
भारतीय Agri-Tech मार्केट तेजी से बड़ा हो रहा है। अनुमान है कि 2026 तक यह $24 बिलियन और 2030 तक $28 बिलियन का आंकड़ा छू सकता है। सिर्फ स्मार्ट एग्रीकल्चर ही नहीं, बल्कि पूरा सेक्टर आने वाले सालों में काफी तेजी से बढ़ेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर जलवायु परिवर्तन के असर से निपटना है, खासकर तब जब 51% खेती बारिश पर निर्भर है। सरकार की 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' और 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) जैसे इनिशिएटिव भी इस बदलाव को रफ्तार दे रहे हैं, क्योंकि ये खेती के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं।
सरकारी साथ और बड़े सहयोग
सरकार का सहयोग भारत के बढ़ते Agri-Tech सेक्टर की एक बड़ी ताकत है। 'नेशनल इनोवेशन इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर' (NICRA) और 'नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर' (NMSA) जैसी योजनाएं खेती को मज़बूत बनाने और टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देने के लिए हैं। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) भी इनोवेशन को बढ़ावा देने और समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Microsoft, NITI Aayog, Dexian India, Luminis जैसे बड़े नामों के साथ हुए सहयोग से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और जीनोमिक्स जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, नए फसलों के लिए रेगुलेटरी बाधाएं और धीमी अप्रूवल प्रक्रियाएं ज़रूरी टेक्नोलॉजी को किसानों तक पहुंचने में देरी कर सकती हैं।
निवेश का नया हब
भारतीय Agri-Tech मार्केट में खूब निवेश आ रहा है, जो शानदार अवसर पेश कर रहा है। इस सेक्टर में प्रेसिजन फार्मिंग (precision farming), AI और मशीन लर्निंग (machine learning), IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), ड्रोन, बायोटेक्नोलॉजी (biotechnology) और डिजिटल सप्लाई चेन (digital supply chain) सॉल्यूशंस जैसी चीजें शामिल हैं। जलवायु स्थिरता के लिए अहम 'रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी' (regenerative agriculture technology) में निवेश बढ़ रहा है, जिसका ग्लोबल मार्केट 2031 तक $31.88 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह भी उम्मीद है कि Agri-Tech में AI सिस्टम्स 2030 तक $5.6 बिलियन तक पहुंच जाएंगे।
अपनाने में हैं बड़ी रुकावटें
इतनी संभावनाओं के बावजूद, कई बड़ी रुकावटें Agri-Tech को किसानों तक पहुंचने से रोक रही हैं। किसानों में डिजिटल साक्षरता की कमी, खराब रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे अविश्वसनीय इंटरनेट और बिजली) बड़ी बाधाएं हैं। कई किसानों के पास छोटे, खंडित खेत हैं, जिससे बड़े पैमाने पर लागत प्रभावी समाधान लागू करना मुश्किल हो जाता है। वित्तीय तंगी और नए तरीकों को अपनाने में हिचकिचाहट भी धीमी गति का कारण बनती है। Agri-Tech सेक्टर में आधुनिक खेती के उपकरण चलाने और रखरखाव के लिए कुशल लोगों की भी कमी है। खराब पोस्ट-हार्वेस्ट और सप्लाई चेन सिस्टम के कारण भारी मात्रा में अनाज बर्बाद हो जाता है। टेक्नोलॉजी होने के बावजूद, अत्यधिक मौसम, पानी की कमी और मिट्टी का क्षरण जैसे जलवायु झटके मूल जोखिम बने हुए हैं, जिससे किसानों की आय 15-18% तक कम हो सकती है। फिलहाल, Agri-Tech का असर कुल कृषि मार्केट के केवल 2% हिस्से पर ही है।
भविष्य की राह
भारत का कृषि क्षेत्र लगातार डिजिटल परिवर्तन और नतीजों पर केंद्रित रहने वाला है। आने वाले बजट से Agri-Tech, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में निवेश बढ़ने की उम्मीद है, जिससे फोकस कल्याण से हटकर कार्यान्वयन पर जाएगा। डेटा-आधारित निर्णय, AI-संचालित सलाह और बेहतर रूरल मैन्युफैक्चरिंग को एकीकृत करना खेती के तरीकों को नया रूप देगा। बागवानी (Horticulture) भी भूमि उपयोग में बदलाव और निर्यात की मांग से प्रेरित होकर एक प्रमुख विकास क्षेत्र के रूप में उभर रही है। सफलता ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी, जो नीतिगत लक्ष्यों और किसानों द्वारा अपनाने के बीच के अंतर को पाटेगा, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित होगा।