NCAER की एक नई रिपोर्ट में **57** सिंचाई परियोजनाओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करने से खेती क्लाइमेट चेंज (Climate Change) के खतरों से नहीं बच सकती। अब निवेशकों को 'क्लाइमेट-स्मार्ट' फार्मिंग और सस्टेनेबिलिटी पर नज़र रखने की ज़रूरत है।
सिंचाई से परे देखने की जरूरत
नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की ताजा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारत को कृषि को बचाने के लिए सिर्फ सिंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना होगा। हालांकि, 20 राज्यों में फैली 57 सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन में यह सामने आया कि संबंधित क्षेत्रों में किसानों की उत्पादकता में 68% का इजाफा हुआ है, लेकिन ये फायदे लंबे समय तक टिके रहेंगे, यह कहना मुश्किल है। कृषि सेक्टर में अब सफलता को सिर्फ पूरी की गई परियोजनाओं या खर्च हुए बजट से नहीं मापा जा सकता।
क्लाइमेट रेजिलिएंस (Climate Resilience) की ओर रुख
रिपोर्ट के मुताबिक, सिंचाई एक अस्थाई सहारा तो है, लेकिन यह कृषि अस्थिरता की जड़ को खत्म नहीं करती। अब नीति निर्माता और निवेशक 'स्कीम कवरेज' जैसे पुराने मानकों से आगे देख रहे हैं। अब ध्यान ग्राउंडवाटर की स्थिरता, मिट्टी की सेहत और खराब मौसम में आय बचाने की क्षमता पर है। जिन इलाकों में जल प्रबंधन बेहतर था, वहां 43.9% किसानों की मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। इसके विपरीत, साक्री लोअर वैली (Sakri Lower Valley) जैसे इलाकों में भारी निवेश के बावजूद पानी की किल्लत बनी रही क्योंकि वहां भूजल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया।
निवेशकों के लिए संकेत
एग्री-वैल्यू चेन पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव दिख रहा है: बाजार अब 'क्लाइमेट-स्मार्ट' एग्रीकल्चर की ओर बढ़ रहा है। जो कंपनियां केवल पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हैं, उन्हें भविष्य में नीतिगत समर्थन कम मिल सकता है। इसके बजाय, अब क्लाइमेट-रेजिलिएंट बीज, मौसम की सटीक जानकारी और प्रेसिजन-आधारित जल प्रबंधन (Precision Water Management) पर जोर दिया जा रहा है।
चिंता के आंकड़े और अवसर
भारत में 17% ग्राउंडवाटर यूनिट्स पहले ही 'ओवर-एक्सप्लॉइटेड' (अत्यधिक दोहन) श्रेणी में हैं। भारत की सिंचाई दक्षता (Irrigation Efficiency) लगभग 38% है, जो विकसित देशों के 55% के मुकाबले काफी कम है। यह अंतर माइक्रो-इरिगेशन और सेंसर-आधारित तकनीक बनाने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है। आगे चलकर सरकार उन्हीं मॉडल्स को प्राथमिकता देगी जो पानी बचाने की तकनीक को मिट्टी और जल संरक्षण के बेहतर नतीजों से जोड़ते हैं।
